📜 सुन्दरकाण्ड पाठ श्री रामचरितमानस — गोस्वामी तुलसीदास जी कृत — हनुमान जी की दिव्य लंका यात्रा
1. मंगलाचरण एवं प्रस्थान
श्री रामचन्द्र जी, हनुमान जी एवं सीता माता की स्तुति तथा पवनपुत्र हनुमान जी का सागर लाँघकर लंका की ओर प्रस्थान
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2. लंका प्रवेश
हनुमान जी द्वारा सुरसा, सिंहिका आदि बाधाओं पर विजय प्राप्त कर सुवर्ण नगरी लंका में प्रवेश एवं विभीषण जी से भेंट
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3. माता सीता से भेंट
हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका में माता सीता की खोज, श्री राम जी की मुद्रिका अर्पित कर माता को सान्त्वना प्रदान
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4. श्री राम का संदेश
हनुमान जी द्वारा भगवान श्री राम का अपार प्रेम, दिव्य आश्वासन एवं शीघ्र आगमन का संदेश माता सीता को प्रदान
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5. अशोक वाटिका विध्वंस
हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका का उजाड़ना, अक्षयकुमार सहित राक्षस सेना का संहार एवं दिव्य पराक्रम का प्रदर्शन
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6. रावण की सभा में
निर्भय हनुमान जी का रावण की राजसभा में प्रभु श्री राम की महिमा का वर्णन, माता सीता को लौटाने एवं शरणागति का उपदेश
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7. लंका दहन
राक्षसों द्वारा पूँछ में अग्नि लगाने पर वीर हनुमान जी का सम्पूर्ण स्वर्ण नगरी लंका को भस्म करना (विभीषण जी का गृह सुरक्षित)
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8. श्री राम के पास वापसी
विजयी हनुमान जी का सागर पार कर प्रभु श्री राम को माता सीता के कुशल-मंगल का शुभ समाचार देना
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9. हनुमान जी का वृत्तान्त
हनुमान जी द्वारा भगवान श्री राम, सुग्रीव एवं सम्पूर्ण वानर सेना को लंका यात्रा का विस्तृत वृत्तान्त सुनाना
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10. विभीषण शरणागति
विभीषण जी का लंका त्यागकर प्रभु श्री राम की शरण में आगमन, भगवान द्वारा कृपापूर्वक शरणागत की रक्षा का वचन
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11. समुद्र से विनती
भगवान श्री राम द्वारा समुद्र से मार्ग देने की विनती, उपेक्षा होने पर दिव्य धनुष उठाना एवं समुद्र का भयभीत होकर शरण में आना
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12. सेतु बन्धन एवं लंका प्रयाण
नल-नील द्वारा सागर पर दिव्य सेतु का निर्माण, वानर सेना का लंका की ओर प्रस्थान एवं सुन्दरकाण्ड का मंगल उपसंहार
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13. आरती श्री रामायण जी की
श्री रामायण जी की पावन आरती — तुलसीदास जी द्वारा श्री सीतापति की कीर्ति, सकल ग्रन्थों के सार एवं मंगल भवन का गान
