
गणेश चतुर्थी — स्थापना व विसर्जन विधि (सिंधी)
गणेश चतुर्थी सिंधी हिंदुओं में अत्यंत लोकप्रिय है — विशेषकर मुंबई और पुणे के सिंधी हब में। सिंधी परिवार घर में गणपति की स्थापना करते हैं और 1.5, 5, 7 या 10 दिन तक पूजा करते हैं। विसर्जन के दिन भव्य जुलूस निकलता है।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त-सितंबर)
मध्याह्न — स्थापना मुहूर्त
Puja Samagri (Items Required)
- गणेश मूर्ति
- मोदक, लड्डू
- दूर्वा (दूब) घास
- सिंदूर, चंदन, अक्षत
- नारियल, सुपारी, पान
Puja Procedure — Steps
स्थापना — प्राण प्रतिष्ठा
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। गणेश मूर्ति रखें। "ओम गं गणपतये नमः" जाप करें। प्राण प्रतिष्ठा करें — मूर्ति में प्राण संचार। दूर्वा, सिंदूर, मोदक अर्पित करें।
प्रतिदिन पूजा
प्रतिदिन सुबह-शाम गणपति की आरती करें। "सुखकर्ता दुःखहर्ता" आरती गाएं। मोदक-लड्डू का भोग लगाएं। 21 दूर्वा डालें।
विसर्जन जुलूस
विसर्जन दिन (1.5/5/7/10 दिन बाद) भव्य जुलूस निकालें। ढोल-ताशे बजाएं। "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!" का जयघोष।
जल विसर्जन & पलव
गणेश मूर्ति को नदी/समुद्र/टैंक में विसर्जित करें। (पर्यावरण हित: मिट्टी की मूर्ति और घर पर बाल्टी में विसर्जन श्रेष्ठ।) पलव करें।
Main Mantra
ओम गं गणपतये नमः । वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ । गणपति बप्पा मोरया!
Benefits of this Puja
विघ्न निवारण, बुद्धि-ज्ञान, शुभ कार्य सिद्धि, समृद्धि।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चतुर्थी — स्थापना व विसर्जन विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त-सितंबर) — मध्याह्न — स्थापना मुहूर्त
गणेश चतुर्थी — स्थापना व विसर्जन विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
गणेश मूर्ति, मोदक, लड्डू, दूर्वा (दूब) घास, सिंदूर, चंदन, अक्षत, नारियल, सुपारी, पान
गणेश चतुर्थी — स्थापना व विसर्जन विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ओम गं गणपतये नमः । वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ । गणपति बप्पा मोरया!
गणेश चतुर्थी — स्थापना व विसर्जन विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
विघ्न निवारण, बुद्धि-ज्ञान, शुभ कार्य सिद्धि, समृद्धि।