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श्री गणपति (कोंकणी — गणेशा)
श्री गणपति (कोंकणी — गणेशा)

चवथ — कोंकणी गणेश चतुर्थी पूजा विधि (मातोळी सहित)

Last updated: 14 June 2026

चवथ (चतुर्थी) कोंकणी हिन्दू समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है। कोंकणी घरों में "मातोळी" — एक लकड़ी का ढाँचा जिसे 108+ प्रकार के स्थानीय जंगली फल, पुष्प एवं सब्ज़ियों से सजाया जाता है — गणपति की मूर्ति के ऊपर लगाई जाती है। यह परम्परा विशुद्ध कोंकणी है और भारत के किसी अन्य भाग में नहीं पाई जाती। गणपति स्थापना, पंचकज्जय (पाँच सामग्री का प्रसाद), मोदक, एवं विसर्जन इस उत्सव के प्रमुख अंग हैं।

Occasion

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त–सितम्बर)

Muhurat

मध्याह्न — गणपति स्थापना

Puja Samagri (Items Required)

  • मातोळी (लकड़ी का ढाँचा, 108+ जंगली फल-पुष्प-सब्ज़ियाँ)
  • गणपति मूर्ति (मिट्टी/शाडू)
  • पंचकज्जय (गुड़, नारियल, घी, गेहूँ, केला)
  • मोदक, लाडू
  • दूर्वा (गणपति हेतु अनिवार्य), लाल पुष्प
  • नारियल, सुपारी, पान
  • कलश, आम-पल्लव, जल
  • दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती, कर्पूर

Puja Procedure — Steps

Step 1

मातोळी सजाना

लकड़ी का चौकोर ढाँचा (मातोळी) बनाएँ — छत/खूँटी से लटकाएँ। 108+ प्रकार के स्थानीय जंगली फल (करवन्द, जांभूळ, आवळा), पुष्प (केवड़ा, चम्पा), सब्ज़ियाँ (दोडका, भिंडी, केली-फूल), पत्तियाँ एवं लताएँ बाँधें। मातोळी = कोंकणी प्रकृति-पूजा का प्रतीक।

Step 2

गणपति स्थापना

शुद्ध मिट्टी/शाडू की गणपति मूर्ति मातोळी के नीचे स्थापित करें। कलश स्थापना — आम-पल्लव, नारियल। अक्षत, कुमकुम, हल्दी, चन्दन से पूजा। "ॐ गं गणपतये नमः" एवं अथर्वशीर्ष पाठ। दूर्वा अर्पित करें (21 गुच्छ)।

Step 3

नैवेद्य एवं पंचकज्जय

पंचकज्जय बनाएँ — गुड़, कसा हुआ नारियल, भुना गेहूँ, घी, केला मिलाएँ। मोदक (उकड़ीचे/तळलेले) बनाएँ। नैवेद्य (भोग) गणपति को अर्पित करें। नारियल तेल का दीपक जलाएँ। कर्पूर आरती करें।

Step 4

विसर्जन

डेढ़/पाँच/सात/ग्यारह दिन पश्चात् विसर्जन। "गणपति बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया" जयघोष। मूर्ति को नदी/समुद्र/कृत्रिम जलकुण्ड में विसर्जित करें। मातोळी के फल-सब्ज़ियाँ परिवार में बाँटें।

Main Mantra

ॐ गं गणपतये नमः ।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

श्री गणेशाय नमः — अथर्वशीर्ष पाठ ।

Benefits of this Puja

चवथ (कोंकणी गणेश चतुर्थी) से विघ्न-हर्ता गणपति की विशेष कृपा, परिवार में सुख-समृद्धि, सर्व कार्य सिद्धि, कोंकणी सांस्कृतिक पहचान।

Important Notes

• मातोळी = चवथ की आत्मा — 108+ वनस्पति अनिवार्य। • पंचकज्जय = गुड़+नारियल+गेहूँ+घी+केला = कोंकणी नैवेद्य। • मिट्टी/शाडू मूर्ति ही उपयोग करें — पर्यावरण-हितैषी। • दूर्वा = गणपति पूजा में अनिवार्य (21 गुच्छ)। • अथर्वशीर्ष पाठ = कोंकणी गणपति पूजा का मुख्य पाठ।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

चवथ — कोंकणी गणेश चतुर्थी पूजा विधि (मातोळी सहित) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त–सितम्बर) — मध्याह्न — गणपति स्थापना

चवथ — कोंकणी गणेश चतुर्थी पूजा विधि (मातोळी सहित) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

मातोळी (लकड़ी का ढाँचा, 108+ जंगली फल-पुष्प-सब्ज़ियाँ), गणपति मूर्ति (मिट्टी/शाडू), पंचकज्जय (गुड़, नारियल, घी, गेहूँ, केला), मोदक, लाडू, दूर्वा (गणपति हेतु अनिवार्य), लाल पुष्प, नारियल, सुपारी, पान, कलश, आम-पल्लव, जल, दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती, कर्पूर

चवथ — कोंकणी गणेश चतुर्थी पूजा विधि (मातोळी सहित)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ गं गणपतये नमः । वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ श्री गणेशाय नमः — अथर्वशीर्ष पाठ ।

चवथ — कोंकणी गणेश चतुर्थी पूजा विधि (मातोळी सहित) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

चवथ (कोंकणी गणेश चतुर्थी) से विघ्न-हर्ता गणपति की विशेष कृपा, परिवार में सुख-समृद्धि, सर्व कार्य सिद्धि, कोंकणी सांस्कृतिक पहचान।

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