
चौरचन्द्र / चौठ चन्द्र पूजा विधि (मिथिला)
चौरचन मिथिला का गणेश चतुर्थी संस्करण — गणेश एवं चन्द्र दोनों की पूजा। विशेष "अरिपन" डिज़ाइन — मिथिला की पवित्र भूमि चित्रकला। मिट्टी/गोबर गणेश मूर्ति। छलनी से चन्द्र दर्शन। प्रसाद = तिलकुट, लड्डू, फल। दरभंगा, मधुबनी में विस्तृत चौरचन अरिपन बनाते हैं।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त–सितम्बर)
सन्ध्या — चन्द्रोदय के बाद (चन्द्र दर्शन अनिवार्य)
Puja Samagri (Items Required)
- मिट्टी/गोबर गणेश मूर्ति
- अरिपन पाउडर
- छलनी (चन्द्र दर्शन हेतु)
- तिलकुट, लड्डू, फल
- दूर्वा, पुष्प, सिन्दूर
- हल्दी, दही, चावल, मोदक
- घी का दीपक, अगरबत्ती
Puja Procedure — Steps
अरिपन रचना
विस्तृत चौरचन अरिपन भूमि एवं दीवारों पर बनाएँ — मिथिला की अनूठी पवित्र चित्रकला। पूजा क्षेत्र सजाएँ। गणेश एवं चन्द्र अरिपन — दरभंगा/मधुबनी शैली।
गणेश स्थापना एवं पूजा
मिट्टी/गोबर गणेश मूर्ति स्थापित करें। दूर्वा, मोदक, पुष्प, सिन्दूर अर्पित। "ॐ गणेशाय नमः", "वक्रतुण्ड महाकाय" जपें। घी दीपक, अगरबत्ती।
चन्द्र दर्शन — छलनी से
चन्द्रोदय पर छलनी से चन्द्र दर्शन — मिथिला विशेष। चन्द्र देव को अर्घ्य। "ॐ चन्द्राय नमः"। परिवार सहित।
प्रसाद वितरण
तिलकुट, लड्डू, फल बाँटें। चौरचन कथा सुनाएँ। परिवार उत्सव। मोदक — बच्चों को विशेष।
Main Mantra
ॐ गणेशाय नमः । ॐ चन्द्राय नमः । वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
Benefits of this Puja
गणेश-चन्द्र कृपा, विघ्न निवारण, मिथिला अरिपन परम्परा, कलात्मक अभिव्यक्ति, मान-सम्मान।
Important Notes
बेर-बेर पुछल जाएबला प्रश्न
चौरचन्द्र / चौठ चन्द्र पूजा विधि (मिथिला) कहिया कएल जाइत अछि आ शुभ मुहूर्त की अछि?
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त–सितम्बर) — सन्ध्या — चन्द्रोदय के बाद (चन्द्र दर्शन अनिवार्य)
चौरचन्द्र / चौठ चन्द्र पूजा विधि (मिथिला) लेल कोन पूजा सामग्री चाही?
मिट्टी/गोबर गणेश मूर्ति, अरिपन पाउडर, छलनी (चन्द्र दर्शन हेतु), तिलकुट, लड्डू, फल, दूर्वा, पुष्प, सिन्दूर, हल्दी, दही, चावल, मोदक, घी का दीपक, अगरबत्ती
चौरचन्द्र / चौठ चन्द्र पूजा विधि (मिथिला) मे कोन मंत्र जपल जाइत अछि?
ॐ गणेशाय नमः । ॐ चन्द्राय नमः । वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
चौरचन्द्र / चौठ चन्द्र पूजा विधि (मिथिला) करबा सँ की लाभ भेटैत अछि?
गणेश-चन्द्र कृपा, विघ्न निवारण, मिथिला अरिपन परम्परा, कलात्मक अभिव्यक्ति, मान-सम्मान।