
श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं विधि (मिथिला परम्परा)
मिथिला कें सत्यनारायण व्रत स्कन्द पुराण कें रेवा खण्ड पर आधारित अछि, मुदा एकर पाठ-शैली, सीरनी (प्रसाद), आ अरिपन परम्परा मिथिला कें विशिष्ट छथि। पूर्णिमा, संक्रान्ति, गृह-प्रवेश आ विवाह कें बाद कएल जाइत अछि।
पूर्णिमा (विशेषतः कार्तिक, बैसाख, ज्येष्ठ), संक्रान्ति, शुभ अवसर
साँझ कें — सूर्यास्त कें बाद ब्रह्म मुहूर्त धरि
Puja Samagri (Items Required)
- सत्यनारायण कथा पुस्तक (मैथिली पाठ संग)
- सीरनी सामग्री: चाउरक आटा (१ किलो), केला (५ पाकल), घी, चीनी, दूध
- पंचमेवा: किशमिश, बादाम, काजू, छुहारा, मिश्री
- पंचामृत: दूध, दही, घी, मधु, चीनी
- तुलसी दल — आवश्यक
- कलश, आम कें पल्लव, नारियल, आसन
- रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर
- पीत वस्त्र, पीत पुष्प (गेंदा, चम्पा)
- धूप, दीप (पाँच बत्तीक घी कें दीप), कपूर
- अरिपन कें लेल पीठार (चानल चाउरक रस)
- केला कें खम्भ — मण्डप कें लेल
Puja Procedure — Steps
अरिपन एवं मण्डप
पूजा स्थल पर पीठार सं अष्टदल कमल कें अरिपन बनाउ। चारू कोन में केला कें खम्भ लगाउ — ई मिथिला मण्डप थिक। मध्य में शालिग्राम/विष्णु मूर्ति आ सत्यनारायण कें चित्र राखू।
संकल्प आ कलश स्थापना
तिलक लगाय कें संकल्प पढ़ू। कलश में जल भरि क' आम पल्लव आ नारियल राखू। पूजा कें उद्देश्य आ संकल्पकर्ताक नाम-गोत्र उच्चारित करू।
षोडशोपचार पूजा
विष्णु सहस्रनाम कें संग सोलह उपचार: आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान (पंचामृत), वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, प्रदक्षिणा, मन्त्रपुष्प।
सीरनी निर्माण
ई मिथिला कें विशिष्ट प्रसाद थिक: कड़ाही में घी गरम करू, चाउरक आटा कें भूनू (हल्का सुनहरा होय धरि)। दूध-चीनी कें चाशनी मिलाय कें केरा आ पंचमेवा डालि क' पकाउ। यैह सत्यनारायण कें मुख्य भोग थिक।
पाँच अध्याय कथा वाचन
सत्यनारायण कथा कें पाँचो अध्याय पाठ करू: (१) नारद-विष्णु संवाद, (२) काशी कें ब्राह्मण, (३) साधु वैश्य कें कथा, (४) कलावती-लीलावती, (५) तुंगध्वज राजा। मिथिला में ई मैथिली अनुवाद कें संग पाठ कएल जाइत अछि।
आरती एवं प्रसाद वितरण
'जय जगदीश हरे' आरती करू। तुलसी दल सहित सीरनी सब उपस्थित कें वितरित करू। प्रसाद ग्रहण कएलाक बिना कोनो भक्त नहि जायत — ई आवश्यक नियम थिक।
ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा
पूजाक समापन पर ब्राह्मण कें भोजन करा क' दक्षिणा देल जाइत अछि। मिथिला में पाँच कुमारी कन्या कें भोजन कराओल जाइत अछि — ई पञ्च-कन्या परम्परा थिक।
Main Mantra
॥ मूल मंत्र ॥ ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः॥ ॥ ध्यान मंत्र ॥ सत्यनारायणं देवं वन्दे'हं कामदं प्रभुम्। लीलया दधतं रूपं भक्तानुग्रह कारणम्॥ ॥ प्रार्थना ॥ नमस्ते सत्यदेवाय भक्तानामिष्टदायिने। नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च॥
Benefits of this Puja
इच्छा-पूर्ति, संतान प्राप्ति, धन-समृद्धि, विद्या एवं ज्ञान, गृह-कलह कें निवारण, विवाह कें योग, व्यापार में लाभ, अकाल-मृत्यु निवारण।
Important Notes
बेर-बेर पुछल जाएबला प्रश्न
श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं विधि (मिथिला परम्परा) कहिया कएल जाइत अछि आ शुभ मुहूर्त की अछि?
पूर्णिमा (विशेषतः कार्तिक, बैसाख, ज्येष्ठ), संक्रान्ति, शुभ अवसर — साँझ कें — सूर्यास्त कें बाद ब्रह्म मुहूर्त धरि
श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं विधि (मिथिला परम्परा) लेल कोन पूजा सामग्री चाही?
सत्यनारायण कथा पुस्तक (मैथिली पाठ संग), सीरनी सामग्री: चाउरक आटा (१ किलो), केला (५ पाकल), घी, चीनी, दूध, पंचमेवा: किशमिश, बादाम, काजू, छुहारा, मिश्री, पंचामृत: दूध, दही, घी, मधु, चीनी, तुलसी दल — आवश्यक, कलश, आम कें पल्लव, नारियल, आसन, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, पीत वस्त्र, पीत पुष्प (गेंदा, चम्पा), धूप, दीप (पाँच बत्तीक घी कें दीप), कपूर, अरिपन कें लेल पीठार (चानल चाउरक रस), केला कें खम्भ — मण्डप कें लेल
श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं विधि (मिथिला परम्परा) मे कोन मंत्र जपल जाइत अछि?
॥ मूल मंत्र ॥ ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः॥ ॥ ध्यान मंत्र ॥ सत्यनारायणं देवं वन्दे'हं कामदं प्रभुम्। लीलया दधतं रूपं भक्तानुग्रह कारणम्॥ ॥ प्रार्थना ॥ नमस्ते सत्यदेवाय भक्तानामिष्टदायिने। नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च॥
श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं विधि (मिथिला परम्परा) करबा सँ की लाभ भेटैत अछि?
इच्छा-पूर्ति, संतान प्राप्ति, धन-समृद्धि, विद्या एवं ज्ञान, गृह-कलह कें निवारण, विवाह कें योग, व्यापार में लाभ, अकाल-मृत्यु निवारण।