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Pooja Vidhi
भगवान सत्यनारायण (विष्णु रूप)
भगवान सत्यनारायण (विष्णु रूप)

सत्यनारायण कथा विधि — गढ़वाली

Last updated: 14 June 2026

सत्यनारायण कथा गढ़वाल मा हर शुभ अवसर मा करी जान्दी छ — गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार शुरुआत, मनौती पूरी होने मा। गढ़वाली शैली मा ये कथा पाहड़ी भजनों के साथ होंदी छ। पंडित जी कथा सुनांदन अर बीच-बीच मा गढ़वाली भजन गाई जान्दन। पंचामृत, शीरो (हलवा) अर चरणामृत प्रसाद मा दिया जान्दो छ।

Occasion

पूर्णिमा, ग्रह प्रवेश, विवाह, किसी भी शुभ अवसर मा

Muhurat

पूर्णिमा या एकादशी, शुभ मुहूर्त

Puja Samagri (Items Required)

  • सत्यनारायण कथा पुस्तक
  • सवा सेर (1.25 किलो) आटा
  • सवा सेर चीनी/गुड़
  • सवा सेर घी
  • केले (5), नारियल, पान-सुपारी
  • पंचामृत सामग्री (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • तुलसी पत्ते, फूल-माला
  • कलश, रोली, अक्षत, मौली
  • दीपक, अगरबत्ती, कपूर

Puja Procedure — Steps

Step 1

संकल्प अर कलश स्थापना

स्नान करी कै साफ कपड़े पहनो। पूजा स्थल मा चौकी रखो, रंगोली बणाओ। कलश मा जल, सुपारी, सिक्का, आम पत्ते रखो — नारियल ऊपर। संकल्प लेओ: "मैं भगवान सत्यनारायण की कथा करदो छुं।"

Step 2

पूजा अर आवाहन

भगवान सत्यनारायण की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करो। पंचामृत से स्नान कराओ, वस्त्र पहनाओ, तुलसी चढ़ाओ। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र बोलो। दीपक अर अगरबत्ती जलाओ।

Step 3

कथा श्रवण

पंडित जी पांच अध्यायों की कथा सुनांदन। बीच-बीच मा गढ़वाली पाहड़ी भजन गाई जान्दन — "हरि ॐ तत्सत्, सत्यनारायण भगवान।" परिवार के सब लोग श्रद्धा से सुणदन अर "जय हो" बोलदन।

Step 4

शीरो (प्रसाद) बणाना

सवा सेर आटे कू सवा सेर घी मा भूनो, सवा सेर चीनी/गुड़ मिलाओ — ये शीरो (हलवा) छ अर सबसे ज़रूरी प्रसाद छ। केले, इलायची भी मिलाओ। ये भगवान कू अर्पित करो।

Step 5

आरती अर प्रसाद

कथा पूरी होने मा आरती करो — "ॐ जय लक्ष्मी रमणा" गाओ। कपूर जलाओ। शीरो, चरणामृत, फल सबमा बांटो। कथा सुनने वाले सबकू प्रसाद मिलणो ज़रूरी छ — बिना खाये मत जाओ।

Main Mantra

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
श्री सत्यनारायण भगवान की जय!
हरि ॐ तत्सत्, सत्यनारायण भगवान,
गढ़वाल मा तेरी कथा गूंजे,
पाहड़ी भजन मा तेरो नाम छ।

Benefits of this Puja

सत्यनारायण कथा से मनोकामना पूर्ति, घर मा सुख-समृद्धि, व्यापार मा वृद्धि, रोग-दोष निवारण अर भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद मिलदो छ।

Important Notes

• कथा पूरी सुनो — बीच मा मत उठो, ये अशुभ छ। • शीरो (प्रसाद) ज़रूर बणाओ — सवा सेर की मात्रा ज़रूरी छ। • कथा सुनने वाले सबकू प्रसाद दियो — कोई खाली मत जाये। • पूर्णिमा कू करणो सबसे शुभ छ। • कथा के बाद ब्राह्मण भोज अर दक्षिणा दियो।
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