
सत्यनारायण कथा बिधि
सत्यनारायण कथा भोजपुरी घर-घर में पूर्णिमा, एकादशी, गृह प्रवेश, बियाह या कवनो शुभ काम पर कइल जाला। भोजपुरी में ई पूजा के "बाबा सत्यनारायण के कथा" कहल जाला। पंचामृत, पंचमेवा आ सिन्नी (प्रसाद) के बँटाना बहुत ज़रूरी बा। नेवता (निमंत्रण) दे के परिवार-पड़ोसी सबके बोलावल जाला।
पूर्णिमा, एकादशी, गृह प्रवेश, बियाह, कवनो शुभ अवसर
संझा — पूर्णिमा के बेर सबसे शुभ
Puja Samagri (Items Required)
- सत्यनारायण कथा पोथी
- नेवता (निमंत्रण पत्र)
- केला (5), पान (5), सुपारी (5)
- आटा (सिन्नी खातिर)
- घी, चीनी, दूध, दही, शहद
- तुलसी पत्ता
- कलश, जल, आमपत्ता, नारियल
- सिंदूर, अक्षत, हल्दी
- फूल, माला
- दीया, धूप
Puja Procedure — Steps
नेवता आ बइठका
परिवार, पड़ोसी आ रिश्तेदार लोग के नेवता (निमंत्रण) दीं। पूजा के जगह पर सब लोग बइठीं। पंडित जी के बोलाईं।
कलश स्थापना
ताँबा या मिट्टी के कलश में जल, आमपत्ता आ नारियल राखीं। कलश भगवान विष्णु के प्रतीक बा।
कथा पाठ
पंडित जी सत्यनारायण कथा के पाँच अध्याय सुनावेले। हर अध्याय के बाद "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जप करीं।
आरती आ सिन्नी बँटाना
आरती करीं। सिन्नी (छातू/सूजी के हलवा प्रसाद) सबके बँटाईं। सिन्नी के अपमान कभो ना करीं — कथा में एकर कड़ा फल बतावल बा।
Main Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। बाबा सत्यनारायण के जय! सबके घर में सुख-शांति होखे!
Benefits of this Puja
सत्यनारायण कथा से घर में सुख-शांति, समृद्धि, कर्जा-मुक्ति, संतान-सुख, बियापार में तरक्की आ ग्रहदोष शांत होला।