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श्री कृष्ण (नरकासुर वधकर्ता)
श्री कृष्ण (नरकासुर वधकर्ता)

नरकासुर वध — दीपावली पूर्व सन्ध्या पूजा विधि (कोंकणी — गोवा)

Last updated: 14 June 2026

नरकासुर वध कोंकणी (विशेषतः गोवा) समुदाय की सबसे अनूठी दीपावली परम्परा है। दीपावली से एक दिन पूर्व (नरक चतुर्दशी) विशालकाय नरकासुर पुतले (10-30 फ़ीट ऊँचे — कागज़/बाँस/पेंट से निर्मित) बनाए जाते हैं। सूर्योदय से पूर्व इन पुतलों को जलाया जाता है — "असत्य/अधर्म पर सत्य/धर्म की विजय।" यह गोवा की सबसे प्रसिद्ध पर्यटन-आकर्षक परम्परा है।

Occasion

नरक चतुर्दशी — दीपावली पूर्व सन्ध्या (अक्टूबर–नवम्बर)

Muhurat

सूर्योदय से पूर्व — नरकासुर दहन

Puja Samagri (Items Required)

  • नरकासुर पुतला (कागज़/बाँस/पेंट
  • पटाखे, आतिशबाज़ी (दहन हेतु)
  • उटणे / उबटन (गन्धित तेल-हल्दी लेप)
  • करंज (कड़वा फल)
  • दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर
  • पंचकज्जय, मिठाई

Puja Procedure — Steps

Step 1

नरकासुर पुतला निर्माण

दीपावली से सप्ताहों पहले मोहल्ले/गाँव के युवा मिलकर नरकासुर पुतला बनाएँ। बाँस का ढाँचा, कागज़/कपड़े की परत, रंगीन पेंट। भयानक/हास्यपूर्ण रूप — विशालकाय राक्षस। गोवा में पुतला प्रतियोगिता — सबसे बड़ा/सबसे सुन्दर पुतला।

Step 2

उटणे स्नान — नरक चतुर्दशी

सूर्योदय से पूर्व जागें। "उटणे" (गन्धित तेल-हल्दी-चन्दन लेप) शरीर पर लगाएँ — शरीर-शुद्धि। करंज (कड़वा फल) पैर से कुचलें — "नरकासुर का सिर कुचलना" = बुराई नष्ट। गर्म जल से स्नान।

Step 3

नरकासुर दहन

सूर्योदय से ठीक पूर्व पुतले को बाहर लाएँ। पटाखे-आतिशबाज़ी। सम्पूर्ण मोहल्ला/गाँव एकत्र। पुतले को आग लगाएँ — विशालकाय लपटें-धुआँ। "कृष्ण ने नरकासुर का वध किया!" जय-जयकार। ढोल-ताशे बजाएँ। गोवा में यह पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण।

Step 4

दीपावली पूजा एवं उत्सव

नरकासुर दहन पश्चात् घर लौटें। लक्ष्मी-गणेश पूजा। दीपक जलाएँ। पंचकज्जय, मिठाई नैवेद्य। पटाखे-आतिशबाज़ी (दीपावली)। परिवार-मित्रों के साथ भोजन।

Main Mantra

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

तमसो मा ज्योतिर्गमय ।

असतो मा सद्गमय ।

Benefits of this Puja

नरकासुर वध से कृष्ण की कृपा, बुराई का नाश, नव-आरम्भ, शरीर-शुद्धि (उटणे), कोंकणी/गोवा सांस्कृतिक पहचान।

Important Notes

• नरकासुर पुतला = गोवा की सबसे अनूठी परम्परा — 10-30 फ़ीट ऊँचा। • सूर्योदय से पूर्व दहन = अनिवार्य — अन्धकार में अग्नि। • उटणे स्नान = शरीर-शुद्धि — कोंकणी शैली। • करंज कुचलना = नरकासुर वध का प्रतीक। • गोवा = नरकासुर प्रतियोगिता — पर्यटन आकर्षण।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

नरकासुर वध — दीपावली पूर्व सन्ध्या पूजा विधि (कोंकणी — गोवा) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

नरक चतुर्दशी — दीपावली पूर्व सन्ध्या (अक्टूबर–नवम्बर) — सूर्योदय से पूर्व — नरकासुर दहन

नरकासुर वध — दीपावली पूर्व सन्ध्या पूजा विधि (कोंकणी — गोवा) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

नरकासुर पुतला (कागज़/बाँस/पेंट, पटाखे, आतिशबाज़ी (दहन हेतु), उटणे / उबटन (गन्धित तेल-हल्दी लेप), करंज (कड़वा फल), दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर, पंचकज्जय, मिठाई

नरकासुर वध — दीपावली पूर्व सन्ध्या पूजा विधि (कोंकणी — गोवा)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । असतो मा सद्गमय ।

नरकासुर वध — दीपावली पूर्व सन्ध्या पूजा विधि (कोंकणी — गोवा) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

नरकासुर वध से कृष्ण की कृपा, बुराई का नाश, नव-आरम्भ, शरीर-शुद्धि (उटणे), कोंकणी/गोवा सांस्कृतिक पहचान।

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