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Pooja Vidhi
सभ देवता (बनारस/काशी के देवगण)

देव दीपावली बिधि

Last updated: 14 June 2026

देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा के बनारस (काशी) में गंगा घाट पर मनावल जाला। कहल जाला कि ई दिन देवता लोग पृथ्वी पर आ के दीवाली मनावेले। वाराणसी के सबहूँ घाट पर लाखों दीया जरावल जाला — ई दृश्य दुनिया में कहीं ना देखाई। भोजपुरी इलाका खातिर ई काशी के सबसे गौरवशाली पर्व बा।

Occasion

कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर)

Muhurat

संझा — सूर्यास्त के बाद

Puja Samagri (Items Required)

  • मिट्टी के दीया (हजारों)
  • सरसों/तिल के तेल
  • फूल, माला, अगरबत्ती
  • गंगा जल
  • कपूर

Puja Procedure — Steps

Step 1

गंगा स्नान

सबेरे गंगा में स्नान करीं। कार्तिक पूर्णिमा के गंगा स्नान बहुत पुण्यकारी बा।

Step 2

घाट पर दीया सजावट

संझा के घाट पर हजारों दीया सजाईं आ जराईं। हर सीढ़ी पर दीया रखीं। गंगा माई के आरती में शामिल होईं।

Step 3

गंगा आरती

विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होईं। बड़का पंडित जी कपूर, दीया आ शंख से आरती करेले। "हर हर महादेव" के जयकारा लगाईं।

Step 4

दीया प्रवाह

गंगा में दीया बहाईं (प्रवाहित करीं)। देवता लोग के स्वागत में प्रार्थना करीं।

Main Mantra

गंगा माई की जय! हर हर महादेव!
देव दीपावली कार्तिक पुन्नम,
सभ देवता अइलन काशी में।

Benefits of this Puja

देव दीपावली से सभ देवता के कृपा, पापनाश, आत्मिक शांति आ काशी-वास के पुण्य मिलेला। गंगा स्नान सभ तीर्थ से बढ़ के बा।

Important Notes

• बनारस/काशी में मनावल जाला — घर पर भी गंगाजल से पूजा कर सकीले। • कार्तिक पूर्णिमा के गंगा स्नान अतिशय पुण्यकारी बा। • पर्यावरण के ध्यान में मिट्टी के दीया इस्तेमाल करीं।
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