देव दीपावली बिधि
देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा के बनारस (काशी) में गंगा घाट पर मनावल जाला। कहल जाला कि ई दिन देवता लोग पृथ्वी पर आ के दीवाली मनावेले। वाराणसी के सबहूँ घाट पर लाखों दीया जरावल जाला — ई दृश्य दुनिया में कहीं ना देखाई। भोजपुरी इलाका खातिर ई काशी के सबसे गौरवशाली पर्व बा।
कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर)
संझा — सूर्यास्त के बाद
Puja Samagri (Items Required)
- मिट्टी के दीया (हजारों)
- सरसों/तिल के तेल
- फूल, माला, अगरबत्ती
- गंगा जल
- कपूर
Puja Procedure — Steps
गंगा स्नान
सबेरे गंगा में स्नान करीं। कार्तिक पूर्णिमा के गंगा स्नान बहुत पुण्यकारी बा।
घाट पर दीया सजावट
संझा के घाट पर हजारों दीया सजाईं आ जराईं। हर सीढ़ी पर दीया रखीं। गंगा माई के आरती में शामिल होईं।
गंगा आरती
विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होईं। बड़का पंडित जी कपूर, दीया आ शंख से आरती करेले। "हर हर महादेव" के जयकारा लगाईं।
दीया प्रवाह
गंगा में दीया बहाईं (प्रवाहित करीं)। देवता लोग के स्वागत में प्रार्थना करीं।
Main Mantra
गंगा माई की जय! हर हर महादेव! देव दीपावली कार्तिक पुन्नम, सभ देवता अइलन काशी में।
Benefits of this Puja
देव दीपावली से सभ देवता के कृपा, पापनाश, आत्मिक शांति आ काशी-वास के पुण्य मिलेला। गंगा स्नान सभ तीर्थ से बढ़ के बा।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देव दीपावली बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर) — संझा — सूर्यास्त के बाद
देव दीपावली बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
मिट्टी के दीया (हजारों), सरसों/तिल के तेल, फूल, माला, अगरबत्ती, गंगा जल, कपूर
देव दीपावली बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
गंगा माई की जय! हर हर महादेव! देव दीपावली कार्तिक पुन्नम, सभ देवता अइलन काशी में।
देव दीपावली बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
देव दीपावली से सभ देवता के कृपा, पापनाश, आत्मिक शांति आ काशी-वास के पुण्य मिलेला। गंगा स्नान सभ तीर्थ से बढ़ के बा।