लाल लोई — सिंधी लोहड़ी पूजा विधि
लाल लोई सिंधी हिंदुओं की लोहड़ी है — पौष मास की अंतिम रात्रि को अलाव जलाकर मनाया जाता है। "तिल और फुली" (तिल व मूंगफली) अग्नि में अर्पित करना परंपरा है। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशु के परिवार के लिए यह बहुत शुभ होता है।
पौष मास अंतिम रात्रि (जनवरी)
रात्रि — अलाव प्रज्वलन
Puja Samagri (Items Required)
- अलाव सामग्री
- तिल
- फुली
- गुड़, रेवड़ी, गजक
- पॉपकॉर्न, मक्खन
Puja Procedure — Steps
अलाव तैयारी
मोहल्ले/कॉलोनी में खुली जगह पर लकड़ी और उपले से अलाव तैयार करें। शाम को सभी परिवार एकत्र हों।
अग्नि प्रज्वलन
बड़े-बुजुर्ग या नवविवाहित जोड़ा अलाव प्रज्वलित करे। "अग्नि देवाय नमः" बोलें। सभी अलाव की परिक्रमा करें।
तिल-फुली अर्पण
अग्नि में तिल, फुली (मूंगफली), गुड़, रेवड़ी, पॉपकॉर्न अर्पित करें। "सुंदर मुंदरिये, होय!" गाएं। नवजात शिशु के परिवार विशेष तौर पर तिल-गुड़ बांटें।
भोज & बधाई
गुड़ की रेवड़ी, गजक, मूंगफली सबको बांटें। नवविवाहितों और नवजात के परिवार को बधाई दें। पलव करके प्रार्थना करें।
Main Mantra
ओम अग्निदेवाय नमः । लाल लोई आई, खुशियां लाई ।
Benefits of this Puja
नवजीवन, शीत ऋतु का अंत, परिवार में खुशी, अग्नि शुद्धि।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लाल लोई — सिंधी लोहड़ी पूजा विधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
पौष मास अंतिम रात्रि (जनवरी) — रात्रि — अलाव प्रज्वलन
लाल लोई — सिंधी लोहड़ी पूजा विधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
अलाव सामग्री, तिल, फुली, गुड़, रेवड़ी, गजक, पॉपकॉर्न, मक्खन
लाल लोई — सिंधी लोहड़ी पूजा विधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ओम अग्निदेवाय नमः । लाल लोई आई, खुशियां लाई ।
लाल लोई — सिंधी लोहड़ी पूजा विधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
नवजीवन, शीत ऋतु का अंत, परिवार में खुशी, अग्नि शुद्धि।