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गौ माता, प्रकृति देव

घी संक्रान्ति (ओलगिया) विधि — गढ़वाली

Last updated: 14 June 2026

घी संक्रान्ति गढ़वाल को सबसे स्वादिष्ट अर विशेष त्योहार छ — ये सिंह संक्रान्ति (अगस्त-सितम्बर) मा मनाई जान्दो छ। इस दिन घी खाणो अनिवार्य छ — "घी ना खाया तो घुण लग जालो" ये कहावत छ। गाय की पूजा हूंदी छ, ओलगी (उपहार) बांटी जान्दी छ अर विशेष पकवान बणाई जान्दन। ये पशुपालन, कृषि अर प्रकृति कू समर्पित त्योहार छ।

Occasion

सिंह संक्रान्ति (अगस्त-सितम्बर)

Muhurat

सिंह संक्रान्ति प्रातःकाल

Puja Samagri (Items Required)

  • शुद्ध देसी घी (गाय का)
  • उड़द की दाल
  • अरबी (गाबा) के पत्ते
  • चावल, रोली, हल्दी, अक्षत
  • फूल-माला
  • दीपक (घी का)
  • ओलगी (उपहार

Puja Procedure — Steps

Step 1

गौ पूजा

सबेरे गाय कू नहलाओ, फूल-माला पहनाओ, माथा मा रोली-अक्षत लगाओ। गाय के पैर छुओ अर प्रणाम करो। गाय कू गुड़, चारा अर विशेष भोजन दियो। गढ़वाल मा गाय सबसे पूज्य छ।

Step 2

घी खाणो

घी संक्रान्ति मा घी खाणो अनिवार्य छ — सब कू खाणो छ। शुद्ध देसी गाय को घी सब पकवानों मा डालो। "घी ना खाया तो घुण लग जालो" — ये गढ़वाली कहावत छ। बच्चों कू भी ज़रूर खिलाओ।

Step 3

विशेष पकवान

अरबी (गाबा) के पत्तों की सब्ज़ी घी मा बणाओ — ये सबसे ज़रूरी छ। उड़द की दाल घी मा तड़का लगाई कै बणाओ। पूड़ी, हलवा, खीर — सब घी मा बणाओ। गढ़वाली पकवान "कापा" भी बणाओ।

Step 4

ओलगी बांटना

ओलगी (उपहार) बांटो — बेटियों अर बहनों कू विशेष ओलगी दिया जान्दो छ (कपड़े, मिठाई, पैसे)। दामाद कू ससुराल से ओलगी मिलदी छ। पड़ोसियों कू भी पकवान भेजो।

Step 5

सामूहिक भोज

पूरा परिवार इकट्ठा होई कै भोजन करो। गांव मा भी सामूहिक भोज हूंदो छ। बड़े-बूढ़े बच्चों कू आशीर्वाद देंदन। ये एकता अर समृद्धि को त्योहार छ।

Main Mantra

ॐ गौ मात्रे नमः।
गौ माता की जय हो, घी संक्रान्ति की जय हो,
शुद्ध घी खाओ, निरोगी रहो,
प्रकृति अर पशुधन कू सम्मान दियो।

Benefits of this Puja

घी संक्रान्ति से शारीरिक स्वास्थ्य (घी से ताकत), गौ माता का आशीर्वाद, परिवार मा एकता, बेटियों कू सम्मान अर पशुपालन परम्परा को संरक्षण हूंदो छ।

Important Notes

• घी ज़रूर खाओ — ये अनिवार्य छ, ना मानो तो अशुभ छ। • शुद्ध देसी गाय को ई घी वर्तो — डालडा/वनस्पति मत वर्तो। • बेटियों कू ओलगी ज़रूर दियो — ये गढ़वाली संस्कार छ। • गाय की पूजा बिना घी संक्रान्ति अधूरी छ। • अरबी के पत्तों की सब्ज़ी ज़रूर बणाओ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घी संक्रान्ति (ओलगिया) विधि — गढ़वाली कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

सिंह संक्रान्ति (अगस्त-सितम्बर) — सिंह संक्रान्ति प्रातःकाल

घी संक्रान्ति (ओलगिया) विधि — गढ़वाली के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

शुद्ध देसी घी (गाय का), उड़द की दाल, अरबी (गाबा) के पत्ते, चावल, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल-माला, दीपक (घी का), ओलगी (उपहार

घी संक्रान्ति (ओलगिया) विधि — गढ़वाली में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ गौ मात्रे नमः। गौ माता की जय हो, घी संक्रान्ति की जय हो, शुद्ध घी खाओ, निरोगी रहो, प्रकृति अर पशुधन कू सम्मान दियो।

घी संक्रान्ति (ओलगिया) विधि — गढ़वाली करने से क्या लाभ मिलते हैं?

घी संक्रान्ति से शारीरिक स्वास्थ्य (घी से ताकत), गौ माता का आशीर्वाद, परिवार मा एकता, बेटियों कू सम्मान अर पशुपालन परम्परा को संरक्षण हूंदो छ।

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