घी संक्रान्ति (ओलगिया) विधि — गढ़वाली
घी संक्रान्ति गढ़वाल को सबसे स्वादिष्ट अर विशेष त्योहार छ — ये सिंह संक्रान्ति (अगस्त-सितम्बर) मा मनाई जान्दो छ। इस दिन घी खाणो अनिवार्य छ — "घी ना खाया तो घुण लग जालो" ये कहावत छ। गाय की पूजा हूंदी छ, ओलगी (उपहार) बांटी जान्दी छ अर विशेष पकवान बणाई जान्दन। ये पशुपालन, कृषि अर प्रकृति कू समर्पित त्योहार छ।
सिंह संक्रान्ति (अगस्त-सितम्बर)
सिंह संक्रान्ति प्रातःकाल
Puja Samagri (Items Required)
- शुद्ध देसी घी (गाय का)
- उड़द की दाल
- अरबी (गाबा) के पत्ते
- चावल, रोली, हल्दी, अक्षत
- फूल-माला
- दीपक (घी का)
- ओलगी (उपहार
Puja Procedure — Steps
गौ पूजा
सबेरे गाय कू नहलाओ, फूल-माला पहनाओ, माथा मा रोली-अक्षत लगाओ। गाय के पैर छुओ अर प्रणाम करो। गाय कू गुड़, चारा अर विशेष भोजन दियो। गढ़वाल मा गाय सबसे पूज्य छ।
घी खाणो
घी संक्रान्ति मा घी खाणो अनिवार्य छ — सब कू खाणो छ। शुद्ध देसी गाय को घी सब पकवानों मा डालो। "घी ना खाया तो घुण लग जालो" — ये गढ़वाली कहावत छ। बच्चों कू भी ज़रूर खिलाओ।
विशेष पकवान
अरबी (गाबा) के पत्तों की सब्ज़ी घी मा बणाओ — ये सबसे ज़रूरी छ। उड़द की दाल घी मा तड़का लगाई कै बणाओ। पूड़ी, हलवा, खीर — सब घी मा बणाओ। गढ़वाली पकवान "कापा" भी बणाओ।
ओलगी बांटना
ओलगी (उपहार) बांटो — बेटियों अर बहनों कू विशेष ओलगी दिया जान्दो छ (कपड़े, मिठाई, पैसे)। दामाद कू ससुराल से ओलगी मिलदी छ। पड़ोसियों कू भी पकवान भेजो।
सामूहिक भोज
पूरा परिवार इकट्ठा होई कै भोजन करो। गांव मा भी सामूहिक भोज हूंदो छ। बड़े-बूढ़े बच्चों कू आशीर्वाद देंदन। ये एकता अर समृद्धि को त्योहार छ।
Main Mantra
ॐ गौ मात्रे नमः। गौ माता की जय हो, घी संक्रान्ति की जय हो, शुद्ध घी खाओ, निरोगी रहो, प्रकृति अर पशुधन कू सम्मान दियो।
Benefits of this Puja
घी संक्रान्ति से शारीरिक स्वास्थ्य (घी से ताकत), गौ माता का आशीर्वाद, परिवार मा एकता, बेटियों कू सम्मान अर पशुपालन परम्परा को संरक्षण हूंदो छ।