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Pooja Vidhi
सूर्य देव (उत्तरायण)
सूर्य देव (उत्तरायण)

मकर संक्रान्ति / सकरात विधि (मिथिला)

Last updated: 14 June 2026

मकर संक्रान्ति (सकरात) मिथिला में — दही-चूड़ा एवं तिल-लड्डू प्रसाद। सूर्य देव उत्तरायण — शुभ काल प्रारम्भ। तिल-गुड़ दान। पतंग उड़ाना। मिथिला विशेष — दही-चूड़ा की थाली (चिउड़ा = चिवड़ा/पोहा), तिल-लड्डू, खिचड़ी। स्नान-दान — नदी/तालाब में। अरिपन सजावट।

Occasion

पौष/माघ — 14-15 जनवरी

Muhurat

प्रातःकाल — स्नान-दान; दोपहर — दही-चूड़ा भोज

Puja Samagri (Items Required)

  • दही, चूड़ा (चिवड़ा/चिउड़ा)
  • तिल, गुड़
  • तिल-लड्डू
  • खिचड़ी सामग्री
  • पतंग
  • घी दीपक
  • अरिपन पाउडर

Puja Procedure — Steps

Step 1

स्नान-दान

प्रातः नदी/तालाब में स्नान। सूर्य देव को अर्घ्य। तिल-गुड़ दान — ब्राह्मणों/ग़रीबों को। "ॐ सूर्याय नमः"।

Step 2

दही-चूड़ा भोज

मिथिला विशेष — दही-चूड़ा (दही + चिउड़ा) की थाली। तिल-लड्डू, गुड़, खिचड़ी। परिवार साथ भोजन।

Step 3

सूर्य पूजा एवं अरिपन

सूर्य देव पूजा — उत्तरायण शुभ। अरिपन बनाएँ — सूर्य डिज़ाइन। घी दीपक।

Step 4

पतंगोत्सव

पतंग उड़ाएँ — सकरात उत्सव। बच्चे-बड़े। तिल-लड्डू बाँटें।

Main Mantra

ॐ सूर्याय नमः ।

ॐ आदित्याय नमः ।

तिलं तिलं च दानं च, सुखं भवतु सर्वदा ।

Benefits of this Puja

सूर्य देव उत्तरायण आशीर्वाद, तिल-दान पुण्य, दही-चूड़ा मिथिला परम्परा, शीत ऋतु स्वास्थ्य, पारिवारिक भोज।

Important Notes

• सकरात = मिथिला की मकर संक्रान्ति। • दही-चूड़ा = मिथिला विशेष भोज — अनिवार्य। • तिल-लड्डू + गुड़ = प्रसाद एवं दान। • सूर्य उत्तरायण = शुभ काल प्रारम्भ। • पतंग = सकरात उत्सव।
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