
मेष
21 मार्च – 19 अप्रैल · अग्नि · मंगलएकान्त आ आराम आइ महत्वपूर्ण अछि। परदाक पाछू काज अधिक सन्तुष्टि दैत अछि। भीतरक शान्ति खोजू।
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उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।।
अर्थ
मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन से अपना उद्धार करे। यह मन ही बंधु है और यही शत्रु भी।
चौपाईजो नहिं करत राम कर सेवा। सो नर पसु बिनु पूँछ खुरा।।
अर्थ
जो मनुष्य श्रीराम की सेवा नहीं करता, वह बिना पूँछ और खुर का पशु है — अर्थात पशु से भी निकृष्ट।
वैदिक घड़ी
आकाश की गणना हो रही है…

एकान्त आ आराम आइ महत्वपूर्ण अछि। परदाक पाछू काज अधिक सन्तुष्टि दैत अछि। भीतरक शान्ति खोजू।
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एक उत्पादक दिन अछि जेतए कड़ी मेहनत रंग आनत। पहिलुकाँ प्रयासक लेल मान्यता भेटि सकैत अछि। परिवारक सदस्य सहायक रहत।
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बृहस्पति बुद्धि आ आशावाद दैत छथि। दान-पुण्य संतुष्टि आनत। बड़-पैघ लोकनिक आशीर्वाद भेटत।
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केतु आइ आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि आनि रहल अछि। ध्यान आ आत्मनिरीक्षण आइ पुरस्कृत अछि। भीतरक आवाज़ सुनू।
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विदेशी सम्बन्ध आ उच्च शिक्षा पर आइ जोर अछि। ज्ञान विस्तारक अवसर सामने अछि। नव क्षितिज खुजत।
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आध्यात्मिक विकास आ आत्म-चिंतनक लेल उत्कृष्ट दिन अछि। अहाँ धार्मिक गतिविधि दिस आकर्षित भऽ सकैत छी। पारिवारिक सामंजस्य खुशी आ संतोष आनत।
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परिवार आ घरेलू सामंजस्य पर ध्यान दिअ। घर सुधारक योग अछि। बड़-पैघ लोक संग समय बिताऊ।
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बुध आइ संवाद कौशल तीव्र कऽ रहल अछि। गपशप आ लिखित कार्य आइ अनुकूल अछि। बात कहबाक शक्ति आइ अहाँक संग अछि।
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कानूनी मामला आ साझेदारी पर आइ प्रकाश अछि। एहि दिशा मे स्पष्टता आएत। सहयोगी मिलिजुलि कऽ काज करत।
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सरकारी और प्रशासनिक मामले अनुकूल रूप से आगे बढ़ते हैं। पासपोर्ट, वीज़ा और दस्तावेजीकरण कार्य प्रगति करते हैं। अधिकार और नेतृत्व गुण बढ़ते हैं।
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यात्राक योजना अनुकूल अछि। छोट यात्रा नव दृष्टि आनि सकैत अछि। नव सीखब क्षितिज विस्तृत करत।
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शुक्र सुंदरता आ सामंजस्य अनैत छथि। कलात्मक गतिविधि अनुकूल अछि। आकर्षण चरम पर अछि।
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गुरुवार भगवान विष्णु को समर्पित है — ब्रह्मांड के पालनकर्ता, जो धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। गुरु (बृहस्पति) के प्रभाव में यह दिन ज्ञान, कृपा और समृद्धि का प्रतीक है।
लक्ष्मी प्रश्नोत्तरी
श्री सूक्तम् किस वेद में मिलता है?