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श्री वरलक्ष्मी (माता लक्ष्मी का वरदायिनी रूप)

वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि (कोंकणी — कलश सज्जा)

Last updated: 14 June 2026

वरलक्ष्मी व्रत कोंकणी (कर्नाटक-केरल) महिलाओं का सबसे महत्त्वपूर्ण व्रत है। इसमें "कलश सज्जा" — नारियल-आम-पल्लव-हल्दी-कुमकुम से सजा कलश जो माता लक्ष्मी का प्रतीक है — की विस्तृत पूजा की जाती है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पूर्व शुक्रवार को यह व्रत रखा जाता है। सुहागिन महिलाएँ पति-परिवार की समृद्धि एवं सौभाग्य हेतु यह व्रत करती हैं।

Occasion

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा से पूर्व शुक्रवार (जुलाई–अगस्त)

Muhurat

प्रातःकाल — कलश स्थापना

Puja Samagri (Items Required)

  • कलश (ताँबे/पीतल
  • नारियल, आम-पल्लव, हल्दी-कुमकुम
  • वरलक्ष्मी धागा (9 धागे
  • लाल साड़ी/वस्त्र (कलश ढकने हेतु)
  • पुष्प, तुलसी, दूर्वा
  • पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई
  • दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती, कर्पूर

Puja Procedure — Steps

Step 1

कलश स्थापना एवं सज्जा

ताँबे/पीतल का कलश शुद्ध जल से भरें। आम-पल्लव रखें। नारियल ऊपर रखें। कलश को लाल साड़ी/वस्त्र से ढकें। हल्दी-कुमकुम-चन्दन लगाएँ। पुष्पमालाओं से सजाएँ — यह माता वरलक्ष्मी का प्रतीक है।

Step 2

वरलक्ष्मी पूजन

कलश के सम्मुख बैठें। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" 108 बार जपें। लक्ष्मी अष्टोत्तर (108 नाम) पाठ। पुष्प, तुलसी अर्पित करें। नारियल तेल का दीपक जलाएँ। व्रत कथा सुनें — माता लक्ष्मी चारुमती को वरलक्ष्मी व्रत सिखाती हैं।

Step 3

वरलक्ष्मी धागा बन्धन

9 सूती धागों को हल्दी-कुमकुम में रंगकर एक डोर बनाएँ। दाहिने हाथ पर बाँधें। यह "वरलक्ष्मी डोर" समृद्धि एवं सौभाग्य का प्रतीक है।

Step 4

नैवेद्य एवं हल्दी-कुमकुम

पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई, पायसम नैवेद्य अर्पित करें। कर्पूर आरती। सुहागिन महिलाओं को "हल्दी-कुमकुम" बाँटें (कोंकणी परम्परा)। प्रसाद बाँटें।

Main Mantra

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ।

श्री वरलक्ष्मी नमोस्तुते ।

ॐ श्रियै नमः ।

Benefits of this Puja

वरलक्ष्मी व्रत से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा, गृह-समृद्धि, पति-परिवार का सौभाग्य, धन-धान्य वृद्धि, कोंकणी महिला सशक्तिकरण।

Important Notes

• वरलक्ष्मी व्रत = कोंकणी (कर्नाटक-केरल) महिलाओं का प्रमुख व्रत। • कलश सज्जा = व्रत की आत्मा — अत्यन्त विस्तृत। • 9 धागों का वरलक्ष्मी डोर = अनिवार्य। • हल्दी-कुमकुम वितरण = कोंकणी/दक्षिण भारतीय परम्परा। • व्रत कथा श्रवण = अनिवार्य।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि (कोंकणी — कलश सज्जा) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा से पूर्व शुक्रवार (जुलाई–अगस्त) — प्रातःकाल — कलश स्थापना

वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि (कोंकणी — कलश सज्जा) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

कलश (ताँबे/पीतल, नारियल, आम-पल्लव, हल्दी-कुमकुम, वरलक्ष्मी धागा (9 धागे, लाल साड़ी/वस्त्र (कलश ढकने हेतु), पुष्प, तुलसी, दूर्वा, पंचकज्जय, नारियल-गुड़ मिठाई, दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती, कर्पूर

वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि (कोंकणी — कलश सज्जा)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः । श्री वरलक्ष्मी नमोस्तुते । ॐ श्रियै नमः ।

वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि (कोंकणी — कलश सज्जा) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

वरलक्ष्मी व्रत से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा, गृह-समृद्धि, पति-परिवार का सौभाग्य, धन-धान्य वृद्धि, कोंकणी महिला सशक्तिकरण।

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