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तुलसी माता एवं भगवान विष्णु (शालिग्राम)

तुलसी लग्न / वोडली दिवाली पूजा विधि (कोंकणी)

Last updated: 14 June 2026

तुलसी लग्न (वोडली दिवाली — "बड़ी दिवाली") कोंकणी समुदाय में दिवाली से भी बड़ा उत्सव माना जाता है। कार्तिक शुक्ल द्वादशी को तुलसी माता का "विवाह" भगवान विष्णु (शालिग्राम) से कराया जाता है। ईख (गन्ना) के डण्डों से मण्डप सजाया जाता है। यह दिन विवाह-ऋतु (लग्न-सीज़न) का शुभारम्भ माना जाता है।

Occasion

कार्तिक शुक्ल द्वादशी (नवम्बर)

Muhurat

सन्ध्या — तुलसी विवाह

Puja Samagri (Items Required)

  • तुलसी वृन्दावन (तुलसी का चबूतरा)
  • शालिग्राम (विष्णु प्रतीक)
  • ईख / गन्ने के डण्डे (मण्डप हेतु)
  • पुष्पमालाएँ, आम-पल्लव
  • हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर
  • नारियल, पान, सुपारी, गुड़
  • दीपक, पटाखे (आतिशबाज़ी)

Puja Procedure — Steps

Step 1

तुलसी वृन्दावन सज्जा

तुलसी के चबूतरे (वृन्दावन) को धोकर शुद्ध करें। ईख/गन्ने के डण्डों से मण्डप बनाएँ। पुष्पमालाएँ, आम-पल्लव, रंगीन कागज़ से सजाएँ। दीपकों की पंक्ति लगाएँ। कुमकुम-हल्दी से रंगोली बनाएँ।

Step 2

तुलसी-विष्णु विवाह

शालिग्राम (विष्णु) को तुलसी वृन्दावन के पास रखें। तुलसी को "दुल्हन" — शालिग्राम को "दूल्हा" मानें। हल्दी-कुमकुम-सिन्दूर लगाएँ। पुष्पमाला पहनाएँ। "ॐ नमो नारायणाय" जपें। मन्त्रों के साथ विवाह सम्पन्न कराएँ।

Step 3

ईख-दीपक-आतिशबाज़ी

ईख/गन्ने से घर सजाएँ — मिठास का प्रतीक। सैकड़ों दीपक जलाएँ (दीपावली से अधिक)। पटाखे-आतिशबाज़ी। यह "वोडली दिवाली" = बड़ी दिवाली — कोंकणी परम्परा में दीपावली से बड़ा उत्सव।

Step 4

नैवेद्य एवं विवाह-ऋतु

नैवेद्य — नारियल-गुड़ मिठाई, ईख का रस, पायसम। प्रसाद बाँटें। इस दिन से विवाह-ऋतु (लग्न-सीज़न) प्रारम्भ। शुभ कार्य इस दिन से आरम्भ करें।

Main Mantra

ॐ नमो नारायणाय ।

तुलसी श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥

Benefits of this Puja

तुलसी लग्न से भगवान विष्णु एवं तुलसी माता की कृपा, विवाह-ऋतु का शुभारम्भ, गृह-शुद्धि, कोंकणी परम्परा का संरक्षण।

Important Notes

• वोडली दिवाली = "बड़ी दिवाली" — दीपावली से भी बड़ा उत्सव (कोंकणी)। • ईख/गन्ना = मण्डप सज्जा — अनिवार्य। • शालिग्राम = विष्णु का प्रतीक — विवाह में अनिवार्य। • तुलसी विवाह = विवाह-ऋतु का शुभारम्भ। • सैकड़ों दीपक = कोंकणी शैली — दीपावली से अधिक।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

तुलसी लग्न / वोडली दिवाली पूजा विधि (कोंकणी) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

कार्तिक शुक्ल द्वादशी (नवम्बर) — सन्ध्या — तुलसी विवाह

तुलसी लग्न / वोडली दिवाली पूजा विधि (कोंकणी) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

तुलसी वृन्दावन (तुलसी का चबूतरा), शालिग्राम (विष्णु प्रतीक), ईख / गन्ने के डण्डे (मण्डप हेतु), पुष्पमालाएँ, आम-पल्लव, हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, नारियल, पान, सुपारी, गुड़, दीपक, पटाखे (आतिशबाज़ी)

तुलसी लग्न / वोडली दिवाली पूजा विधि (कोंकणी)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ नमो नारायणाय । तुलसी श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे । नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥

तुलसी लग्न / वोडली दिवाली पूजा विधि (कोंकणी) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

तुलसी लग्न से भगवान विष्णु एवं तुलसी माता की कृपा, विवाह-ऋतु का शुभारम्भ, गृह-शुद्धि, कोंकणी परम्परा का संरक्षण।

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