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महालक्ष्मी देवी
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महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो — 16 दिन व्रत विधि (सिंधी)

Last updated: 14 June 2026

महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो सिंधी महिलाओं का 16 दिन का व्रत है — महालक्ष्मी को समर्पित। "सग्रो" का अर्थ है "पवित्र धागा" — व्रत के अंत में 16 गांठों वाला पवित्र धागा बांधा जाता है। यह व्रत आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है। 16 गांठ बांधने की "कैसे बांधें" विधि अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Occasion

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा (सितंबर-अक्टूबर)

Muhurat

प्रातःकाल — 16 दिन प्रतिदिन

Puja Samagri (Items Required)

  • सग्रो
  • महालक्ष्मी मूर्ति/तस्वीर
  • हल्दी, सिंदूर, मौली
  • पुष्प, अक्षत, दीपक
  • फल, मिठाई

Puja Procedure — Steps

Step 1

16 दिन व्रत संकल्प (16-Day Vrat Sankalp)

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को संकल्प लें। 16 दिनों तक प्रतिदिन सुबह महालक्ष्मी पूजा करें। सात्विक भोजन खाएं। कुछ महिलाएं एक समय भोजन (एकाशन) व्रत रखती हैं।

Step 2

प्रतिदिन पूजा

महालक्ष्मी की मूर्ति/तस्वीर पर सिंदूर, पुष्प, अक्षत चढ़ाएं। "ओम श्री महालक्ष्म्यै नमः" 108 बार जाप करें। दीपक जलाएं। 16 प्रकार के फल/मिठाई अर्पित करें।

Step 3

सग्रो बांधना — 16 गांठ

16वें दिन (पूर्णिमा) पवित्र धागे (सग्रो) में 16 गांठें बांधें। प्रत्येक गांठ पर "ओम महालक्ष्म्यै नमः" बोलें। हल्दी-सिंदूर लगाकर सग्रो को गले या कलाई में बांधें। यह 16 सौभाग्य का प्रतीक है।

Step 4

पलव & उद्यापन

महालक्ष्मी के सामने पलव करें। उद्यापन (समापन पूजा) करें। सुहागन स्त्रियों को "सुहाग सामग्री" (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी) दान करें। प्रसाद बांटें।

Main Mantra

ओम श्री महालक्ष्म्यै नमः ।

महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो, सोलह गांठ सुख सग्रो ।

Benefits of this Puja

महालक्ष्मी कृपा, सौभाग्य, धन-समृद्धि, पति की दीर्घायु।

Important Notes

• सग्रो (पवित्र धागा) में ठीक 16 गांठें होनी चाहिए — एक-एक गांठ मंत्र से बांधें। • 16 दिनों तक सात्विक आहार अनिवार्य। • यह व्रत विशेष रूप से सिंधी सुहागन स्त्रियों के लिए है। • "सग्रो" शब्द सिंधी में पवित्र धागे के लिए प्रयोग होता है। • उद्यापन (समापन पूजा) 16वें दिन अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो — 16 दिन व्रत विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा (सितंबर-अक्टूबर) — प्रातःकाल — 16 दिन प्रतिदिन

महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो — 16 दिन व्रत विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

सग्रो, महालक्ष्मी मूर्ति/तस्वीर, हल्दी, सिंदूर, मौली, पुष्प, अक्षत, दीपक, फल, मिठाई

महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो — 16 दिन व्रत विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ओम श्री महालक्ष्म्यै नमः । महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो, सोलह गांठ सुख सग्रो ।

महालक्ष्मी-अ-जो-सग्रो — 16 दिन व्रत विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

महालक्ष्मी कृपा, सौभाग्य, धन-समृद्धि, पति की दीर्घायु।

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