
ललही छठ (जन्माष्टमी) बिधि
ललही छठ भोजपुरी में जन्माष्टमी के नजदीक मनावल जाए वाला एक खास पर्व बा जवना में बच्चन के सुख-कल्याण खातिर माई लोग व्रत रखेली। कृष्ण जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मावल जाला — दही-हांडी, माखन-मिश्री छोटका लल्ला (कृष्ण) के चढ़ावल जाला। भोजपुरी में गोपाल पूजा के "लल्ला छठ" कहल जाला। मथुरा-काशी-नंदगाँव के परंपरा यहवाँ झलकेला।
भादो कृष्ण अष्टमी (अगस्त–सितंबर)
मध्यरात्रि — रोहिणी नक्षत्र में जन्म
Puja Samagri (Items Required)
- छोटका लल्ला (कृष्ण) मूर्ति
- माखन, मिश्री, दूध
- तुलसी पत्ता
- दही-हांडी
- फूल, माला, चंदन
- मोर पंख
- दीया, धूप, कपूर
- पेड़ा, मीठाई
Puja Procedure — Steps
झूला सजावट
छोटका झूला में लल्ला (कृष्ण) मूर्ति सजाईं। फूल, मोर पंख, रंग-बिरंगी कपड़ा से सजाईं।
उपवास आ पूजा
दिन भर उपवास करीं। संझा के लल्ला के माखन-मिश्री, तुलसी, चंदन से पूजा करीं।
मध्यरात्रि जन्मोत्सव
रात 12:00 AM पर शंख बजाईं, आरती करीं। लल्ला के स्नान कराईं। "हरे कृष्ण" कीर्तन करीं। दही-हांडी फोड़ीं।
भोग आ प्रसाद
माखन, मिश्री, पेड़ा, खीर के भोग लगाईं। मध्यरात्रि के बाद उपवास तोड़ीं।
Main Mantra
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। लल्ला के चरनवा में हमरो प्रणाम!
Benefits of this Puja
ललही छठ से बच्चन के दीर्घायु, स्वास्थ, सुख-समृद्धि आ कृष्ण भगवान के कृपा मिलेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ललही छठ (जन्माष्टमी) बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
भादो कृष्ण अष्टमी (अगस्त–सितंबर) — मध्यरात्रि — रोहिणी नक्षत्र में जन्म
ललही छठ (जन्माष्टमी) बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
छोटका लल्ला (कृष्ण) मूर्ति, माखन, मिश्री, दूध, तुलसी पत्ता, दही-हांडी, फूल, माला, चंदन, मोर पंख, दीया, धूप, कपूर, पेड़ा, मीठाई
ललही छठ (जन्माष्टमी) बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। लल्ला के चरनवा में हमरो प्रणाम!
ललही छठ (जन्माष्टमी) बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
ललही छठ से बच्चन के दीर्घायु, स्वास्थ, सुख-समृद्धि आ कृष्ण भगवान के कृपा मिलेला।