
छठ पूजा विधि (मिथिला — मैथिल परम्परा)
छठ पूजा मिथिला (दरभंगा, मधुबनी, सहरसा) का "महापर्व" है — मैथिल समुदाय का सबसे पवित्र एवं कठिन व्रत। चार दिवसीय अनुष्ठान: (1) नहाय-खाय, (2) लोहण्डा/खरना, (3) सन्ध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य), (4) उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य)। ठेकुआ एवं कसार — विशेष स्थानीय चावल से बने प्रसाद। नदी/तालाब के घाट पर अरिपन (भूमि चित्रकला) बनाई जाती है। "ओरियान" (पूजा तैयारी क्षेत्र) — स्वच्छ, सात्विक वातावरण अनिवार्य। 36 घण्टे का निर्जला व्रत।
कार्तिक शुक्ल षष्ठी — चार दिवसीय महापर्व (अक्टूबर–नवम्बर)
सन्ध्या अर्घ्य — सूर्यास्त; उषा अर्घ्य — सूर्योदय
Puja Samagri (Items Required)
- दउरा (बाँस की टोकरी)
- सूप (छाज)
- ठेकुआ (गेहूँ-गुड़ प्रसाद)
- कसार (चावल-गुड़ लड्डू)
- गन्ना, केला, नारियल
- हल्दी, सिन्दूर
- घी का दीपक
- चावल, फल, मौसमी सब्ज़ियाँ
- दूध, जल कलश
Puja Procedure — Steps
नहाय-खाय
प्रथम दिन — व्रती नदी/तालाब में शुद्धि स्नान करें। घर की सम्पूर्ण सफ़ाई। कद्दू-भात या चने की दाल का भोजन — केवल सात्विक। ओरियान (पूजा क्षेत्र) तैयार करें।
लोहण्डा/खरना
द्वितीय दिन — सन्ध्या को सूर्य देव को खीर-रोटी का भोग लगाएँ। व्रती खीर-रोटी ग्रहण करें। इसके बाद 36 घण्टे का निर्जला व्रत प्रारम्भ।
सन्ध्या अर्घ्य
तृतीय दिन सन्ध्या — दउरा में ठेकुआ, कसार, फल, गन्ना सजाएँ। घाट पर अरिपन बनाएँ। व्रती जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दें। "ॐ सूर्याय नमः" — परिवार सहित।
उषा अर्घ्य
चतुर्थ दिन प्रातः — उगते सूर्य को अर्घ्य। व्रती पुनः जल में खड़े होकर सूर्योदय पर अर्घ्य दें। "छठी मैया की जय!" व्रत तोड़ें — प्रसाद वितरण।
Main Mantra
ॐ सूर्याय नमः । ॐ छठी मैया की जय । ॐ आदित्याय नमः ।
Benefits of this Puja
सूर्य देव-छठी मैया आशीर्वाद, सन्तान सुख, परिवार स्वास्थ्य, मिथिला सांस्कृतिक पहचान, आत्म-शुद्धि।