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Pooja Vidhi
छठी मइया (सूर्यदेव के पत्नी)
छठी मइया (सूर्यदेव के पत्नी)

छठ पूजा बिधि

Last updated: 14 June 2026

छठ पूजा भोजपुरी इलाका के सबसे बड़ "महापर्व" बा। ई चार दिन के पर्व — नहाय-खाय, खरना, संझा के अरघ आ भोर के अरघ — पूरा सिरिस्ता से मनावल जाला। छठी मइया आ सूर्यदेव के पूजा नदी-तालाब-घाट पर कइल जाला। ई पूजा बिना कवनो पंडित जी के, खाली श्रद्धा आ सफाई से कइल जाला। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आ पूरा दुनिया में बसल भोजपुरी लोग ई पर्व बड़ा भक्ति से मनावेला।

Occasion

कार्तिक शुक्ल षष्ठी (अक्टूबर–नवंबर)

Muhurat

तीसरा दिन — संझा के डूबत सूरज के अरघ; चौथा दिन — भोर के उगत सूरज के अरघ

Puja Samagri (Items Required)

  • सूप (बाँस के सूप)
  • ठेकुआ (गुड़-आटा के प्रसाद)
  • केला, नारियल, सेब, नींबू, गन्ना
  • सुथनी, शकरकंद
  • अगरबत्ती, कपूर, दीया, घी
  • हरदी (हल्दी) के पौधा
  • पीयर (पीला) साड़ी/धोती
  • नया गमछा
  • दउरा (बड़ सूप)
  • दूध, पानी

Puja Procedure — Steps

Step 1

नहाय-खाय — पहिला दिन

व्रती (छठ करे वाली) सबेरे नहा-धो के लउकी-चना दाल आ अरवा चावल के भात बनावे। ई खाना एकदम शुद्ध आ सात्विक होखे। पूरा घर के सफाई कइल जाला।

Step 2

खरना — दूसरा दिन

दिन भर निर्जला उपवास। संझा के गुड़ के खीर (रसिया), रोटी आ फल के भोग लगा के तब् खाइल जाला। एकरा बाद 36 घंटा के निर्जला उपवास शुरू होला।

Step 3

संझा के अरघ — तीसरा दिन

व्रती पीयर साड़ी पहिन के अरघ के सामाग्री ले के घाट पर जाले। कमर तक पानी में खड़ा हो के डूबत सूरज के अरघ (जल अर्पण) दिहल जाला। सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, हरदी सब सजा के रखल जाला। छठ गीत गावल जाला।

Step 4

भोर के अरघ — चौथा दिन

रात भर व्रती जगले। भोर होखे से पहिले घाट पर पहुँच के उगत सूरज के अरघ दिहल जाला। एकरा बाद प्रसाद बँटाइल जाला आ व्रती के पारन (उपवास तोड़ना) कराइल जाला।

Main Mantra

उगो हो सुरुज देव भइल अरघ के बेर,
छठी मइया अइतू अंगना।
केलवा जे फरेला घवद से,
ओह पर सुगा मंडराय।

Benefits of this Puja

छठ पूजा से सूर्यदेव आ छठी मइया के कृपा मिलेला, संतान के सुख, रोग से मुक्ति, गरीबी दूर होला आ परिवार में सुख-शांति के आशीर्वाद मिलेला। ई व्रत बहुत फलदायी मानल जाला।

Important Notes

• पूजा बिना पंडित के कइल जाला — खाली श्रद्धा चाहीं। • सफाई सबसे जरूरी बा — लहसुन-प्याज बिलकुल ना। • 36 घंटा निर्जला उपवास बहुत कड़ा बा — तबीयत के ध्यान रखीं। • घाट के सफाई ज़रूर करीं — छठ के पवित्रता के मतलब बा। • ठेकुआ आ सामान सब नया बर्तन में बनाईं।
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