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भगवान श्रीकृष्ण
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जन्माष्टमी — झूल (पालना) विधि (सिंधी)

Last updated: 14 June 2026

जन्माष्टमी सिंधी हिंदुओं में बड़े उत्साह से मनाई जाती है। सिंधी परंपरा में "झूल" (पालना) सजाकर मध्यरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। "ताहिरी" (मीठे चावल) विशेष प्रसाद है जो सिंधी जन्माष्टमी की पहचान है। दही-हांडी और माखन चोरी की झांकियां लगती हैं।

Occasion

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अगस्त-सितंबर)

Muhurat

मध्यरात्रि — कृष्ण जन्म काल

Puja Samagri (Items Required)

  • झूल (पालना) — सजा हुआ
  • कृष्ण मूर्ति (बाल गोपाल)
  • ताहिरी (मीठे चावल)
  • माखन, मिश्री, दूध
  • पुष्प, तुलसी, दीपक

Puja Procedure — Steps

Step 1

झूल सजाना

पालने (झूल) को फूलों, बंदनवारों, चांदी/तांबे के आभूषणों से सजाएं। बाल गोपाल (कृष्ण) की मूर्ति को नहलाकर, वस्त्र पहनाकर झूल में रखें।

Step 2

व्रत & भजन कीर्तन

पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखें। शाम से मध्यरात्रि तक भजन-कीर्तन करें — "यशोमति मैया से बोले नंदलाला", "गोविंदा आला रे"।

Step 3

मध्यरात्रि — कृष्ण जन्म

ठीक रात 12:00 AM शंख बजाएं। "नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!" गाएं। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। झूल को झुलाएं।

Step 4

ताहिरी प्रसाद & पलव

ताहिरी (मीठे चावल) का प्रसाद बांटें — सिंधी जन्माष्टमी का विशेष प्रसाद। पंचामृत से अभिषेक करें। पलव करें। व्रत खोलें।

Main Mantra

ओम नमो भगवते वासुदेवाय ।

नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की ।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

Benefits of this Puja

कृष्ण कृपा, संतान सुख, आनंद, पाप निवारण।

Important Notes

• झूल (पालना) सजाना सिंधी जन्माष्टमी की विशेषता है। • ताहिरी (मीठे चावल) सिंधी जन्माष्टमी का अनिवार्य प्रसाद। • मध्यरात्रि तक व्रत रखना और भजन गाना अनिवार्य। • व्रत के नियम: अन्न, नमक और प्याज-लहसुन वर्जित; आवश्यकता हो तो केवल फलाहार लें। • पारण मध्यरात्रि की निशीथ काल जन्म-पूजा के बाद ही करें — उससे पहले व्रत न खोलें। • वृद्ध, रोगी, गर्भवती अथवा औषधि लेने वाले दिनभर फलाहार कर, मध्यरात्रि पूजा के बाद तुलसी-जल से पारण कर सकते हैं। • सिंधी परिवार भव्य झूल सजाने की प्रतियोगिता करते हैं। • पलव से पूजा संपन्न।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी — झूल (पालना) विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अगस्त-सितंबर) — मध्यरात्रि — कृष्ण जन्म काल

जन्माष्टमी — झूल (पालना) विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

झूल (पालना) — सजा हुआ, कृष्ण मूर्ति (बाल गोपाल), ताहिरी (मीठे चावल), माखन, मिश्री, दूध, पुष्प, तुलसी, दीपक

जन्माष्टमी — झूल (पालना) विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ओम नमो भगवते वासुदेवाय । नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की । हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

जन्माष्टमी — झूल (पालना) विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

कृष्ण कृपा, संतान सुख, आनंद, पाप निवारण।

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