
ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी)
ग्यारस (एकादशी) सिंधी हिंदुओं में बहुत महत्वपूर्ण व्रत है — प्रत्येक माह की शुक्ल और कृष्ण एकादशी पर कठोर उपवास रखा जाता है। सिंधी परंपरा में "दान" (चैरिटी) को एकादशी पर सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है। अनाज न खाकर, फलाहार या निर्जला व्रत किया जाता है।
प्रत्येक माह — शुक्ल और कृष्ण एकादशी (24 बार/वर्ष)
प्रातःकाल — एकादशी तिथि
Puja Samagri (Items Required)
- विष्णु मूर्ति/तस्वीर
- तुलसी, पुष्प, चंदन
- फल
- दान सामग्री
- दीपक, अगरबत्ती
Puja Procedure — Steps
एकादशी व्रत
दशमी (10वीं तिथि) की शाम से व्रत शुरू करें। एकादशी पर अनाज (चावल, गेहूं, दाल) पूर्णतः वर्जित। केवल फल, दूध, या निर्जला (जल भी नहीं) व्रत।
विष्णु पूजा
विष्णु भगवान की पूजा करें। तुलसी, चंदन, पुष्प अर्पित करें। "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" 108 बार जाप। विष्णु सहस्रनाम पाठ करें।
दान — चैरिटी
ग्यारस पर दान सर्वोपरि है — सिंधी परंपरा। गरीबों को अनाज, वस्त्र, धन दान करें। गौ सेवा (गौ माता को चारा) करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
द्वादशी पारण & पलव
द्वादशी (12वीं तिथि) पर सही समय पर व्रत खोलें। तुलसी जल पीकर पारण करें। पलव करें।
Main Mantra
ओम नमो भगवते वासुदेवाय । एकादशी व्रतं कर्तव्यम्, विष्णु प्रीत्यर्थं सदा ।
Benefits of this Puja
विष्णु कृपा, पाप निवारण, मोक्ष मार्ग, दान का अनंत फल।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रत्येक माह — शुक्ल और कृष्ण एकादशी (24 बार/वर्ष) — प्रातःकाल — एकादशी तिथि
ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
विष्णु मूर्ति/तस्वीर, तुलसी, पुष्प, चंदन, फल, दान सामग्री, दीपक, अगरबत्ती
ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ओम नमो भगवते वासुदेवाय । एकादशी व्रतं कर्तव्यम्, विष्णु प्रीत्यर्थं सदा ।
ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
विष्णु कृपा, पाप निवारण, मोक्ष मार्ग, दान का अनंत फल।