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भगवान विष्णु
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ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी)

Last updated: 14 June 2026

ग्यारस (एकादशी) सिंधी हिंदुओं में बहुत महत्वपूर्ण व्रत है — प्रत्येक माह की शुक्ल और कृष्ण एकादशी पर कठोर उपवास रखा जाता है। सिंधी परंपरा में "दान" (चैरिटी) को एकादशी पर सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है। अनाज न खाकर, फलाहार या निर्जला व्रत किया जाता है।

Occasion

प्रत्येक माह — शुक्ल और कृष्ण एकादशी (24 बार/वर्ष)

Muhurat

प्रातःकाल — एकादशी तिथि

Puja Samagri (Items Required)

  • विष्णु मूर्ति/तस्वीर
  • तुलसी, पुष्प, चंदन
  • फल
  • दान सामग्री
  • दीपक, अगरबत्ती

Puja Procedure — Steps

Step 1

एकादशी व्रत

दशमी (10वीं तिथि) की शाम से व्रत शुरू करें। एकादशी पर अनाज (चावल, गेहूं, दाल) पूर्णतः वर्जित। केवल फल, दूध, या निर्जला (जल भी नहीं) व्रत।

Step 2

विष्णु पूजा

विष्णु भगवान की पूजा करें। तुलसी, चंदन, पुष्प अर्पित करें। "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" 108 बार जाप। विष्णु सहस्रनाम पाठ करें।

Step 3

दान — चैरिटी

ग्यारस पर दान सर्वोपरि है — सिंधी परंपरा। गरीबों को अनाज, वस्त्र, धन दान करें। गौ सेवा (गौ माता को चारा) करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

Step 4

द्वादशी पारण & पलव

द्वादशी (12वीं तिथि) पर सही समय पर व्रत खोलें। तुलसी जल पीकर पारण करें। पलव करें।

Main Mantra

ओम नमो भगवते वासुदेवाय ।

एकादशी व्रतं कर्तव्यम्, विष्णु प्रीत्यर्थं सदा ।

Benefits of this Puja

विष्णु कृपा, पाप निवारण, मोक्ष मार्ग, दान का अनंत फल।

Important Notes

• सिंधी में एकादशी को "ग्यारस" कहते हैं। • अनाज पूर्णतः वर्जित — चावल, गेहूं, दाल, नमक विशेष। • दान (चैरिटी) सिंधी एकादशी की सबसे बड़ी विशेषता। • द्वादशी पारण का समय सटीक होना चाहिए। • सिंधी परिवार हर महीने दो ग्यारस रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रत्येक माह — शुक्ल और कृष्ण एकादशी (24 बार/वर्ष) — प्रातःकाल — एकादशी तिथि

ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

विष्णु मूर्ति/तस्वीर, तुलसी, पुष्प, चंदन, फल, दान सामग्री, दीपक, अगरबत्ती

ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ओम नमो भगवते वासुदेवाय । एकादशी व्रतं कर्तव्यम्, विष्णु प्रीत्यर्थं सदा ।

ग्यारस — एकादशी व्रत विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

विष्णु कृपा, पाप निवारण, मोक्ष मार्ग, दान का अनंत फल।

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