
देवोत्थान एकादशी विधि (मिथिला — विष्णु जागरण)
देवोत्थान एकादशी — विष्णु भगवान को शयन से जगाने का पर्व। कार्तिक शुक्ल एकादशी। मिथिला में विशेष मैथिली लोकगीतों से विष्णु जागरण। तुलसी विवाह — तुलसी एवं शालिग्राम का विवाह। शुभ कार्यों (विवाह आदि) का मुहूर्त पुनः प्रारम्भ। अरिपन सजावट। दरभंगा, मधुबनी में विशेष आयोजन।
कार्तिक शुक्ल एकादशी (नवम्बर)
प्रातःकाल — विष्णु जागरण; सन्ध्या — तुलसी विवाह
Puja Samagri (Items Required)
- तुलसी का पौधा
- शालिग्राम शिला
- गन्ना, पुष्प, हल्दी
- सिन्दूर, कुमकुम
- घी दीपक, अगरबत्ती
- फल, मिठाई
- अरिपन पाउडर
Puja Procedure — Steps
विष्णु जागरण
प्रातः विष्णु भगवान को मैथिली लोकगीतों से जगाएँ — "जागो देव जागो!" शंख बजाएँ। विष्णु मूर्ति/शालिग्राम पूजा। अरिपन।
तुलसी विवाह
तुलसी पौधे एवं शालिग्राम का विवाह — गन्ने का मण्डप। हल्दी-सिन्दूर लगाएँ। फेरे/परिक्रमा।
मैथिली लोकगीत
विष्णु जागरण एवं तुलसी विवाह के विशेष मैथिली लोकगीत गाएँ — मिथिला की अनूठी परम्परा। महिलाएँ समूह में गाएँ।
प्रसाद एवं मंगल
प्रसाद बाँटें — फल, मिठाई। शुभ कार्य पुनः प्रारम्भ — विवाह मुहूर्त। परिवार उत्सव।
Main Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । जागो देव जागो, देवोत्थान भयो । ॐ तुलस्यै नमः ।
Benefits of this Puja
विष्णु जागरण आशीर्वाद, तुलसी विवाह पुण्य, शुभ कार्य प्रारम्भ, मिथिला लोकगीत परम्परा, पारिवारिक मंगल।