
व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर)
व्युग पूजा कश्मीरी पण्डित विवाह संस्कार (खण्डर) की मुख्य पूजा विधि है। कश्मीरी विवाह "खण्डर" कहलाता है — जो 3-7 दिन का विस्तृत अनुष्ठान है। व्युग पूजा में वर-वधू देवी-देवता (शिव-पार्वती) की साक्षी में विवाह-बन्धन में बँधते हैं। "देविगोन" (फूलों का तोरण/मण्डप), हवन, "लगन-पत्रिका" पठन, एवं मन्त्रोच्चारण इस विधि के अनिवार्य अंग हैं।
विवाह — शुभ मुहूर्त अनुसार
शुभ मुहूर्त — ज्योतिषी द्वारा निर्धारित
Puja Samagri (Items Required)
- देविगोन (फूलों का तोरण
- हवन कुण्ड, हवन सामग्री
- लगन-पत्रिका (विवाह पत्र)
- वर-वधू वस्त्र
- कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, हल्दी
- अखरोट, कमल-गट्टा, मिश्री
- जल-कलश, दूध, दही, घी
- सप्तपदी सामग्री
Puja Procedure — Steps
देविगोन स्थापना एवं मण्डप सज्जा
विवाह-स्थल पर "देविगोन" (फूलों का तोरण — कमण्डल, मालाएँ, पुष्प) स्थापित करें। कश्मीरी परम्परा में मण्डप = "देविगोन"। हवन कुण्ड स्थापित करें। कलश स्थापना करें। वर-वधू के आसन सजाएँ।
लगन-पत्रिका एवं व्युग पूजन
पुरोहित लगन-पत्रिका (विवाह पत्र) पढ़ें — वर-वधू का नाम, गोत्र, मुहूर्त। व्युग पूजा — दम्पति के सामने हवन करें। "ॐ हिरण्यगर्भः समवर्ततग्रे..." मन्त्र जपें। शिव-पार्वती को साक्षी मानें।
सप्तपदी एवं विवाह बन्धन
वर-वधू चावल के सात ढेरों पर सप्तपदी (सात फेरे) लें। प्रत्येक फेरे पर वैदिक मन्त्र जपें। वर सिन्दूरदान करे। वधू को अखरोट, कमल-गट्टा दें। "ॐ अग्निम् साक्षी..." — अग्नि साक्षी में विवाह।
आशीर्वाद एवं नवीद
बड़ों का आशीर्वाद लें। पुरोहित को दक्षिणा दें। नवीद (मिठाई, सूखे मेवे) बाँटें। कश्मीरी वाज़वान (शाकाहारी) भोज आयोजित करें।
Main Mantra
ॐ हिरण्यगर्भः समवर्ततग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् । ॐ गृह्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः । ॐ सप्तपदी — एकमिषे विष्णुस्त्वान्वेतु...
Benefits of this Puja
व्युग पूजा (कश्मीरी विवाह) से शिव-पार्वती का आशीर्वाद, दाम्पत्य सुख, वंश-वृद्धि, सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
विवाह — शुभ मुहूर्त अनुसार — शुभ मुहूर्त — ज्योतिषी द्वारा निर्धारित
व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
देविगोन (फूलों का तोरण, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, लगन-पत्रिका (विवाह पत्र), वर-वधू वस्त्र, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, हल्दी, अखरोट, कमल-गट्टा, मिश्री, जल-कलश, दूध, दही, घी, सप्तपदी सामग्री
व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ हिरण्यगर्भः समवर्ततग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् । ॐ गृह्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः । ॐ सप्तपदी — एकमिषे विष्णुस्त्वान्वेतु...
व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
व्युग पूजा (कश्मीरी विवाह) से शिव-पार्वती का आशीर्वाद, दाम्पत्य सुख, वंश-वृद्धि, सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण।