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भगवान शिव-पार्वती (विवाह आदर्श)
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व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर)

Last updated: 14 June 2026

व्युग पूजा कश्मीरी पण्डित विवाह संस्कार (खण्डर) की मुख्य पूजा विधि है। कश्मीरी विवाह "खण्डर" कहलाता है — जो 3-7 दिन का विस्तृत अनुष्ठान है। व्युग पूजा में वर-वधू देवी-देवता (शिव-पार्वती) की साक्षी में विवाह-बन्धन में बँधते हैं। "देविगोन" (फूलों का तोरण/मण्डप), हवन, "लगन-पत्रिका" पठन, एवं मन्त्रोच्चारण इस विधि के अनिवार्य अंग हैं।

Occasion

विवाह — शुभ मुहूर्त अनुसार

Muhurat

शुभ मुहूर्त — ज्योतिषी द्वारा निर्धारित

Puja Samagri (Items Required)

  • देविगोन (फूलों का तोरण
  • हवन कुण्ड, हवन सामग्री
  • लगन-पत्रिका (विवाह पत्र)
  • वर-वधू वस्त्र
  • कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, हल्दी
  • अखरोट, कमल-गट्टा, मिश्री
  • जल-कलश, दूध, दही, घी
  • सप्तपदी सामग्री

Puja Procedure — Steps

Step 1

देविगोन स्थापना एवं मण्डप सज्जा

विवाह-स्थल पर "देविगोन" (फूलों का तोरण — कमण्डल, मालाएँ, पुष्प) स्थापित करें। कश्मीरी परम्परा में मण्डप = "देविगोन"। हवन कुण्ड स्थापित करें। कलश स्थापना करें। वर-वधू के आसन सजाएँ।

Step 2

लगन-पत्रिका एवं व्युग पूजन

पुरोहित लगन-पत्रिका (विवाह पत्र) पढ़ें — वर-वधू का नाम, गोत्र, मुहूर्त। व्युग पूजा — दम्पति के सामने हवन करें। "ॐ हिरण्यगर्भः समवर्ततग्रे..." मन्त्र जपें। शिव-पार्वती को साक्षी मानें।

Step 3

सप्तपदी एवं विवाह बन्धन

वर-वधू चावल के सात ढेरों पर सप्तपदी (सात फेरे) लें। प्रत्येक फेरे पर वैदिक मन्त्र जपें। वर सिन्दूरदान करे। वधू को अखरोट, कमल-गट्टा दें। "ॐ अग्निम् साक्षी..." — अग्नि साक्षी में विवाह।

Step 4

आशीर्वाद एवं नवीद

बड़ों का आशीर्वाद लें। पुरोहित को दक्षिणा दें। नवीद (मिठाई, सूखे मेवे) बाँटें। कश्मीरी वाज़वान (शाकाहारी) भोज आयोजित करें।

Main Mantra

ॐ हिरण्यगर्भः समवर्ततग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् ।

ॐ गृह्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः ।

ॐ सप्तपदी — एकमिषे विष्णुस्त्वान्वेतु...

Benefits of this Puja

व्युग पूजा (कश्मीरी विवाह) से शिव-पार्वती का आशीर्वाद, दाम्पत्य सुख, वंश-वृद्धि, सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण।

Important Notes

• खण्डर = कश्मीरी विवाह — 3-7 दिन का अनुष्ठान। • देविगोन = फूलों का तोरण/मण्डप — कश्मीरी विशिष्ट। • सप्तपदी = चावल के ढेरों पर — कश्मीरी शैली। • लगन-पत्रिका = विवाह का आधिकारिक पत्र। • अखरोट = कश्मीर की पहचान — विवाह में अनिवार्य। • शाकाहारी वाज़वान = कश्मीरी पण्डित विवाह भोज।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

विवाह — शुभ मुहूर्त अनुसार — शुभ मुहूर्त — ज्योतिषी द्वारा निर्धारित

व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

देविगोन (फूलों का तोरण, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, लगन-पत्रिका (विवाह पत्र), वर-वधू वस्त्र, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, हल्दी, अखरोट, कमल-गट्टा, मिश्री, जल-कलश, दूध, दही, घी, सप्तपदी सामग्री

व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ हिरण्यगर्भः समवर्ततग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत् । ॐ गृह्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः । ॐ सप्तपदी — एकमिषे विष्णुस्त्वान्वेतु...

व्युग पूजा — कश्मीरी विवाह संस्कार विधि (खण्डर) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

व्युग पूजा (कश्मीरी विवाह) से शिव-पार्वती का आशीर्वाद, दाम्पत्य सुख, वंश-वृद्धि, सांस्कृतिक परम्परा का संरक्षण।

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