
सह-व्रत — कश्मीरी उपवास विधि (कश्मीरी पण्डित)
सह-व्रत कश्मीरी पण्डितों की विशिष्ट उपवास (व्रत) परम्परा है — विशेषतः विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु एवं परिवार की समृद्धि हेतु यह व्रत करती हैं। यह करवा चौथ के समान है किन्तु कश्मीरी शैली में भिन्न। निर्जल उपवास, शिव-पार्वती पूजन, एवं चन्द्र दर्शन पश्चात् व्रत पारण इसके मुख्य अंग हैं।
भाद्रपद / आश्विन मास — विशेष तिथि
प्रातःकाल (व्रत प्रारम्भ) — रात्रि चन्द्र दर्शन (व्रत पारण)
Puja Samagri (Items Required)
- शिव-पार्वती प्रतिमा / चित्र
- कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, बिल्वपत्र
- दीपक (घी), अगरबत्ती
- फल, मिश्री, दूध
- छलनी (चन्द्र दर्शन हेतु)
- जल-पात्र (व्रत पारण हेतु)
Puja Procedure — Steps
व्रत संकल्प — प्रातःकाल
सूर्योदय से पूर्व "सरगी" (प्रातः भोजन) करें — दूध, फल, सूखे मेवे। संकल्प लें — "मैं आज सह-व्रत करती हूँ — पति की दीर्घायु एवं परिवार की समृद्धि हेतु।" सूर्योदय के बाद निर्जल उपवास प्रारम्भ।
शिव-पार्वती पूजन
ठोकुर कुठ में शिव-पार्वती की प्रतिमा/चित्र के सम्मुख बैठें। कुमकुम-सिन्दूर-चन्दन तिलक लगाएँ। बिल्वपत्र, पुष्प, अक्षत अर्पित करें। "ॐ नमः शिवाय" 108 बार जपें। पति की दीर्घायु हेतु प्रार्थना करें।
निर्जल उपवास एवं ध्यान
दिनभर निर्जल उपवास रखें। इष्ट देवता का ध्यान करें। शिव-पार्वती की कथा सुनें / पढ़ें। परिवार की सेवा करें — व्रत में सेवा = पुण्य।
चन्द्र दर्शन एवं व्रत पारण
सन्ध्या को छत / खुले स्थान पर जाएँ। छलनी से चन्द्रमा देखें — फिर पति का मुख देखें। पति जल पिलाएँ। प्रथम ग्रास पति के हाथ से लें। नवीद (फल, मिश्री) बाँटें।
Main Mantra
ॐ नमः शिवाय । ॐ उमा-महेश्वराभ्यां नमः । ॐ सौभाग्यं देहि मे देव सुमङ्गलम् ।
Benefits of this Puja
सह-व्रत से पति की दीर्घायु, दाम्पत्य सुख, सौभाग्य वृद्धि, शिव-पार्वती की विशेष कृपा, परिवार में मांगलिक वातावरण।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सह-व्रत — कश्मीरी उपवास विधि (कश्मीरी पण्डित) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
भाद्रपद / आश्विन मास — विशेष तिथि — प्रातःकाल (व्रत प्रारम्भ) — रात्रि चन्द्र दर्शन (व्रत पारण)
सह-व्रत — कश्मीरी उपवास विधि (कश्मीरी पण्डित) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
शिव-पार्वती प्रतिमा / चित्र, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, बिल्वपत्र, दीपक (घी), अगरबत्ती, फल, मिश्री, दूध, छलनी (चन्द्र दर्शन हेतु), जल-पात्र (व्रत पारण हेतु)
सह-व्रत — कश्मीरी उपवास विधि (कश्मीरी पण्डित) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ नमः शिवाय । ॐ उमा-महेश्वराभ्यां नमः । ॐ सौभाग्यं देहि मे देव सुमङ्गलम् ।
सह-व्रत — कश्मीरी उपवास विधि (कश्मीरी पण्डित) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
सह-व्रत से पति की दीर्घायु, दाम्पत्य सुख, सौभाग्य वृद्धि, शिव-पार्वती की विशेष कृपा, परिवार में मांगलिक वातावरण।