
मिथिला दीपावली / सुखरात्रि पूजन विधि
मिथिला में दीपावली राति कें 'सुखरात्रि' कहल जाइत अछि — ई बंगाल कें काली पूजा कें समानान्तर मनाओल जाइत अछि। उत्तर भारतक लक्ष्मी पूजा सं भिन्न, मिथिला में मुख्य पूजा माँ काली आ कुलदेवी (गोसाउनि) कें कएल जाइत अछि। बादक भोर लक्ष्मी पूजा होइत अछि।
कार्तिक अमावस्या (दीपावली राति)
मध्य रात्रि (निशीथ काल) — काली पूजा; भोर 4:00–6:00 AM — लक्ष्मी पूजा
Puja Samagri (Items Required)
- माटिक काली मूर्ति (अस्थायी, राति में बनायल)
- १०८ माटिक दीप
- लाल जवा-कुसुम (हिबिस्कस) फूल
- खीर, खिचड़ी (चाउर-दाल), लड्डू
- नारियल, केला, अनार
- गन्ना, मखान, बताशा
- धूप, दीप, अगरबत्ती, घी
- गोसाउनि घर कें लेल — सिन्दूर, चाउर, चानल चाउरक पीठार
- लक्ष्मी कें लेल — कमल पुष्प, पीतवस्त्र, सिक्का
- अरिपन कें लेल पीठार आ रंग
Puja Procedure — Steps
साँझक तैयारी
साँझ कें घरक मुख्य द्वार, आँगन, गोसाउनि-घर आ तुलसी चौरा पर अरिपन बनाउ। १०८ दीप जलाउ — विशेष रूप सं तुलसी, गोसाउनि, कुआँ आ खेत में।
गोसाउनि पूजा
साँझक मुख्य पूजा गोसाउनि-घर में होइत अछि। कुलदेवी कें सिन्दूर, चाउर, धूप-दीप अर्पित करू। परिवारक सब सदस्य प्रणाम करू। यैह मिथिला दीपावली कें केन्द्र थिक।
काली मूर्ति निर्माण
रातिक पूजा कें लेल माटिक काली मूर्ति बनाउ। ई अस्थायी मूर्ति थिक — बादक दिन विसर्जित कएल जाइत अछि।
मध्य रात्रि काली पूजा
निशीथ काल (राति 12:00 AM) में काली पूजा करू। १०८ जवा कुसुम अर्पित करू, खिचड़ी आ खीरक भोग लगाउ। 'जय जय भैरवि असुर भयावनि' (विद्यापति) पाठ करू।
रात्रि जागरण
परिवार राति भर जागल रहैत अछि — दीप पुनः-पुनः जरायल जाइत अछि, गीत-कीर्तन होइत अछि। काली कें यैह रातिक प्रकट होयब मानल जाइत अछि।
भोर लक्ष्मी पूजा
भोर 4:00–6:00 AM (ब्रह्म मुहूर्त) में लक्ष्मी पूजा करू। कमल, पीत वस्त्र, सिक्का, मखान-बताशा अर्पित करू। 'श्रीं ह्रीं श्रीं' मंत्रक १०८ जप।
गोवर्धन-यम द्वितीया
अगिला दिन गोवर्धन (अन्नकूट) आ ओकर बादक दिन यम-द्वितीया (भाई-बहिनक पाबनि) मनाउ — मिथिला में ई पाँच दिनक उत्सव कें भाग थिक।
Main Mantra
॥ काली मूल मंत्र ॥ ॐ क्रीं काली क्रीं काली क्रीं ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा॥ ॥ गोसाउनि आह्वान ॥ जय जय गोसाउनि कुलदेवी, कुलक रक्षिणी माँ। मिथिला कें घर-घर वासिनी, अशीष देहु अहाँ॥
Benefits of this Puja
कुलक रक्षा, परिवार में दीर्घायु आ निरोगता, धन-धान्य कें वृद्धि, माँ काली कें कृपा सं भय-शत्रु-नाश, गोसाउनि कें आशीर्वाद सं वंश-वृद्धि।
Important Notes
बेर-बेर पुछल जाएबला प्रश्न
मिथिला दीपावली / सुखरात्रि पूजन विधि कहिया कएल जाइत अछि आ शुभ मुहूर्त की अछि?
कार्तिक अमावस्या (दीपावली राति) — मध्य रात्रि (निशीथ काल) — काली पूजा; भोर 4:00–6:00 AM — लक्ष्मी पूजा
मिथिला दीपावली / सुखरात्रि पूजन विधि लेल कोन पूजा सामग्री चाही?
माटिक काली मूर्ति (अस्थायी, राति में बनायल), १०८ माटिक दीप, लाल जवा-कुसुम (हिबिस्कस) फूल, खीर, खिचड़ी (चाउर-दाल), लड्डू, नारियल, केला, अनार, गन्ना, मखान, बताशा, धूप, दीप, अगरबत्ती, घी, गोसाउनि घर कें लेल — सिन्दूर, चाउर, चानल चाउरक पीठार, लक्ष्मी कें लेल — कमल पुष्प, पीतवस्त्र, सिक्का, अरिपन कें लेल पीठार आ रंग
मिथिला दीपावली / सुखरात्रि पूजन विधि मे कोन मंत्र जपल जाइत अछि?
॥ काली मूल मंत्र ॥ ॐ क्रीं काली क्रीं काली क्रीं ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा॥ ॥ गोसाउनि आह्वान ॥ जय जय गोसाउनि कुलदेवी, कुलक रक्षिणी माँ। मिथिला कें घर-घर वासिनी, अशीष देहु अहाँ॥
मिथिला दीपावली / सुखरात्रि पूजन विधि करबा सँ की लाभ भेटैत अछि?
कुलक रक्षा, परिवार में दीर्घायु आ निरोगता, धन-धान्य कें वृद्धि, माँ काली कें कृपा सं भय-शत्रु-नाश, गोसाउनि कें आशीर्वाद सं वंश-वृद्धि।