
कजरी तीज बिधि
कजरी तीज भादो कृष्ण तृतीया के मनावल जाला। भोजपुरी इलाका में ई "कजरी गीत" खातिर प्रसिद्ध बा। रात भर जाग के मेंहदी लगावल, झूला झूलल आ कजरी गीत गावल जाला। सुहागिन महिला पति के दीर्घायु खातिर व्रत रखेली। मिर्जापुर, वाराणसी, बलिया के कजरी गायन पूरा भोजपुरी बेल्ट में प्रसिद्ध बा।
भादो कृष्ण तृतीया (अगस्त)
संझा — रात भर जागरण
Puja Samagri (Items Required)
- मेंहदी
- झूला (रस्सी/पेड़ पर)
- सिंदूर, चूड़ी, बिछुवा
- नीम के दतवन
- फल, मीठाई, दूध
- दीया, अगरबत्ती
Puja Procedure — Steps
सोलह सिंगार आ मेंहदी
सुहागिन महिला सोलह सिंगार करेली — सिंदूर, बिंदी, मेंहदी, चूड़ी, बिछुवा सब। हाथ आ गोड़ में मेंहदी लगवाईं।
पूजा
पार्वती माई के पूजा करीं। नीम के दतवन (दांत साफ करे के लकड़ी) चढ़ाईं — ई कजरी तीज के खास सिरिस्ता बा।
झूला आ कजरी गीत
पेड़ पर या बरामदा में झूला झूलीं। रात भर कजरी गीत गाईं। कजरी में बिरह (विरह), पावस (बारिश) आ प्रेम के भाव बा।
पारन
भोर में नहा-धो के व्रत खोलीं। फल-मीठाई खाईं। प्रसाद बँटाईं।
Main Mantra
ॐ पार्वत्यै नमः। बिरह कजरी के गीत सुनाव, पार्वती माई के चरण में प्रणाम!"
Benefits of this Puja
कजरी तीज से सुहाग (पति) के दीर्घायु, दाम्पत्य प्रेम, पारिवारिक सुख आ पार्वती माई के आशीर्वाद मिलेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कजरी तीज बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
भादो कृष्ण तृतीया (अगस्त) — संझा — रात भर जागरण
कजरी तीज बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
मेंहदी, झूला (रस्सी/पेड़ पर), सिंदूर, चूड़ी, बिछुवा, नीम के दतवन, फल, मीठाई, दूध, दीया, अगरबत्ती
कजरी तीज बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ पार्वत्यै नमः। बिरह कजरी के गीत सुनाव, पार्वती माई के चरण में प्रणाम!"
कजरी तीज बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
कजरी तीज से सुहाग (पति) के दीर्घायु, दाम्पत्य प्रेम, पारिवारिक सुख आ पार्वती माई के आशीर्वाद मिलेला।