
अनंत चतुर्दशी बिधि
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के मनावल जाला। भोजपुरी इलाका में ई दिन "अनंत" (14 गाँठ वाला पवित्र धागा) हाथ में बँधाइल जाला। भगवान विष्णु के अनंत रूप के पूजा होखेला। कुश (दभ) के अनंत बना के जल के ऊपर विष्णु भगवान के ध्यान लगावल जाला। गणेश विसर्जन भी ई दिन होखेला।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (सितंबर)
सबेरे — प्रातःकाल
Puja Samagri (Items Required)
- अनंत धागा (14 गाँठ)
- कुश (दभ)
- हल्दी, अक्षत, फूल
- पंचामृत
- फल, मीठाई
- दीया, धूप
Puja Procedure — Steps
अनंत धागा तैयारी
कुश (दभ) या सूत से 14 गाँठ वाला अनंत धागा तैयार करीं। हल्दी से रंगीं।
विष्णु पूजा
भगवान विष्णु के अनंत रूप के पूजा करीं। पंचामृत, फूल, तुलसी, चंदन चढ़ाईं। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जप करीं।
अनंत बँधाना
पूजा के बाद अनंत धागा दाहिने हाथ में बँधाईं। 14 गाँठ अनंत संसार चक्र के 14 लोक के प्रतीक बा।
कथा आ प्रसाद
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा सुनीं। प्रसाद बँटाईं।
Main Mantra
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। अनंतं वासुदेवं च सर्वपापनिबर्हणम्, नमामि पुण्डरीकाक्षं शंखचक्रधरं विभुम्॥
Benefits of this Puja
अनंत चतुर्दशी से भगवान विष्णु के अनंत कृपा, पापनाश, समृद्धि आ 14 लोक के पुण्य मिलेला। अनंत धागा सुरक्षा कवच के काम करेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनंत चतुर्दशी बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (सितंबर) — सबेरे — प्रातःकाल
अनंत चतुर्दशी बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
अनंत धागा (14 गाँठ), कुश (दभ), हल्दी, अक्षत, फूल, पंचामृत, फल, मीठाई, दीया, धूप
अनंत चतुर्दशी बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। अनंतं वासुदेवं च सर्वपापनिबर्हणम्, नमामि पुण्डरीकाक्षं शंखचक्रधरं विभुम्॥
अनंत चतुर्दशी बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
अनंत चतुर्दशी से भगवान विष्णु के अनंत कृपा, पापनाश, समृद्धि आ 14 लोक के पुण्य मिलेला। अनंत धागा सुरक्षा कवच के काम करेला।