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भगवान विष्णु (अनन्त रूप — शेषनाग)
भगवान विष्णु (अनन्त रूप — शेषनाग)

अनन्त चतुर्दशी पूजा विधि (कोंकणी GSB — अनन्त धागा)

Last updated: 14 June 2026

अनन्त चतुर्दशी गौड़ सारस्वत ब्राह्मण (GSB) एवं कोंकणी हिन्दू समुदाय का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण व्रत है। इसमें 14 गाँठों वाला "अनन्त धागा" (सूत्र) दाहिने हाथ पर बाँधा जाता है, जो भगवान विष्णु के अनन्त (शेषनाग) रूप का प्रतीक है। विस्तृत "वटुक पूजा" (कलश पूजा), 14 प्रकार के फल-अन्न का नैवेद्य, एवं अनन्त-व्रत कथा श्रवण इस विधि के अंग हैं।

Occasion

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (सितम्बर)

Muhurat

प्रातःकाल — अनन्त धागा बन्धन

Puja Samagri (Items Required)

  • अनन्त धागा / सूत्र (14 गाँठ
  • वटुक (कलश
  • 14 प्रकार के फल-अन्न (नैवेद्य)
  • कुमकुम, हल्दी, चन्दन, अक्षत
  • दूर्वा, तुलसी, पुष्प
  • दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती

Puja Procedure — Steps

Step 1

अनन्त धागा तैयारी

सूती धागे में 14 गाँठें बाँधें। धागे को हल्दी-कुमकुम में रंगें। यह "अनन्त सूत्र" भगवान विष्णु के 14 भुवनों (लोकों) का प्रतीक है।

Step 2

वटुक पूजा

कलश (वटुक) स्थापित करें — जल, आम-पल्लव, नारियल। कुमकुम-हल्दी-चन्दन से पूजा। तुलसी, दूर्वा, पुष्प अर्पित करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जपें। विष्णु सहस्रनाम / अनन्त स्तोत्र पाठ।

Step 3

अनन्त धागा बन्धन एवं कथा

14 गाँठों वाला अनन्त धागा दाहिने हाथ पर बाँधें (पुरुष) / बायें हाथ पर (महिलाएँ)। अनन्त व्रत कथा सुनें — शीला रानी एवं कौण्डिन्य ऋषि की कथा। 14 प्रकार के फल-अन्न नैवेद्य अर्पित करें।

Step 4

नैवेद्य वितरण एवं समापन

प्रसाद (पंचकज्जय, लाडू, फल) बाँटें। अनन्त धागा 14 दिन पहनें — चतुर्दशी तक। 14 दिन पश्चात् विसर्जन — धागा अनन्त (विष्णु) को अर्पित कर जल में विसर्जित करें।

Main Mantra

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

अनन्ताय नमः, अच्युताय नमः, गोविन्दाय नमः ।

ॐ विष्णवे नमः ।

Benefits of this Puja

अनन्त चतुर्दशी व्रत से भगवान विष्णु (अनन्त) की विशेष कृपा, 14 लोकों की रक्षा, अक्षय सम्पत्ति, GSB सांस्कृतिक पहचान।

Important Notes

• अनन्त धागा = 14 गाँठें = 14 भुवन — अनिवार्य। • वटुक पूजा = GSB/कोंकणी विशेष कलश पूजा। • 14 प्रकार के फल-अन्न नैवेद्य = अनिवार्य। • अनन्त कथा श्रवण = व्रत का अनिवार्य अंग। • GSB समुदाय का सबसे महत्त्वपूर्ण व्रत।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

अनन्त चतुर्दशी पूजा विधि (कोंकणी GSB — अनन्त धागा) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (सितम्बर) — प्रातःकाल — अनन्त धागा बन्धन

अनन्त चतुर्दशी पूजा विधि (कोंकणी GSB — अनन्त धागा) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

अनन्त धागा / सूत्र (14 गाँठ, वटुक (कलश, 14 प्रकार के फल-अन्न (नैवेद्य), कुमकुम, हल्दी, चन्दन, अक्षत, दूर्वा, तुलसी, पुष्प, दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती

अनन्त चतुर्दशी पूजा विधि (कोंकणी GSB — अनन्त धागा)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । अनन्ताय नमः, अच्युताय नमः, गोविन्दाय नमः । ॐ विष्णवे नमः ।

अनन्त चतुर्दशी पूजा विधि (कोंकणी GSB — अनन्त धागा) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

अनन्त चतुर्दशी व्रत से भगवान विष्णु (अनन्त) की विशेष कृपा, 14 लोकों की रक्षा, अक्षय सम्पत्ति, GSB सांस्कृतिक पहचान।

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