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भगवान विष्णु / माता लक्ष्मी / पितृ देवता
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अक्षय तृतीया पूजा विधि (कोंकणी — स्वर्ण-पितृ तर्पण)

Last updated: 14 June 2026

अक्षय तृतीया कोंकणी समुदाय में दो प्रमुख कार्यों का दिन है — (1) स्वर्ण (सोना) ख़रीदना — "अक्षय" = कभी न घटने वाली समृद्धि, (2) पितृ तर्पण — पूर्वजों को जल-तिल अर्पण। वैशाख शुक्ल तृतीया = वर्ष का सर्वाधिक शुभ दिन — कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के कर सकते हैं। कोंकणी परम्परा में नारियल, आम, एवं तटीय प्रसाद।

Occasion

वैशाख शुक्ल तृतीया (अप्रैल–मई)

Muhurat

सम्पूर्ण दिन शुभ — कोई मुहूर्त आवश्यक नहीं

Puja Samagri (Items Required)

  • स्वर्ण आभूषण/सिक्के (ख़रीदने हेतु)
  • काले तिल, जल (पितृ तर्पण हेतु)
  • कुश (दर्भ घास)
  • नारियल, पुष्प, हल्दी-कुमकुम
  • दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती
  • पंचकज्जय, आम, दान सामग्री

Puja Procedure — Steps

Step 1

प्रातः स्नान एवं विष्णु पूजा

प्रातःकाल स्नान-शृंगार। विष्णु/लक्ष्मी पूजा — "ॐ नमो नारायणाय" जपें। हल्दी-कुमकुम, तुलसी, पुष्प अर्पित करें। नारियल तेल दीपक जलाएँ।

Step 2

स्वर्ण ख़रीद

अक्षय तृतीया = स्वर्ण ख़रीदने का सर्वश्रेष्ठ दिन। सोने के आभूषण/सिक्के/बिस्कुट ख़रीदें। "अक्षय" = जो कभी घटे नहीं — शाश्वत समृद्धि। कोंकणी महिलाएँ = सोने के "ताली" (मंगलसूत्र) ख़रीदती हैं।

Step 3

पितृ तर्पण

दक्षिण दिशा की ओर मुख करें। कुश (दर्भ) हाथ में लें। काले तिल + जल मिलाएँ। पितृ देवताओं (पूर्वजों) का नाम लेते हुए तर्पण दें — जल-तिल पृथ्वी/नदी/समुद्र में अर्पित करें। कोंकणी तटीय परम्परा — समुद्र तट पर तर्पण।

Step 4

दान एवं नैवेद्य

अक्षय तृतीया = दान का सर्वश्रेष्ठ दिन। अन्न, वस्त्र, जल, छाता (गर्मी में) दान करें। पंचकज्जय, आम, नैवेद्य अर्पित करें। प्रसाद बाँटें।

Main Mantra

ॐ नमो नारायणाय ।

ॐ पितृभ्यो नमः ।

अक्षय फल दातारं — सर्व कार्यार्थ सिद्धिदम् ।

Benefits of this Puja

अक्षय तृतीया से विष्णु/लक्ष्मी कृपा, शाश्वत समृद्धि (स्वर्ण), पितृ-तृप्ति, दान-पुण्य, कोंकणी तट पर तर्पण।

Important Notes

• अक्षय = "कभी न घटने वाला" — इस दिन का सब कुछ अक्षय। • स्वर्ण ख़रीद = कोंकणी/भारतीय परम्परा — सबसे शुभ दिन। • पितृ तर्पण = समुद्र तट पर — कोंकणी तटीय विशेष। • सम्पूर्ण दिन शुभ = कोई मुहूर्त अनावश्यक। • दान = अक्षय फल देता है।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

अक्षय तृतीया पूजा विधि (कोंकणी — स्वर्ण-पितृ तर्पण) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

वैशाख शुक्ल तृतीया (अप्रैल–मई) — सम्पूर्ण दिन शुभ — कोई मुहूर्त आवश्यक नहीं

अक्षय तृतीया पूजा विधि (कोंकणी — स्वर्ण-पितृ तर्पण) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

स्वर्ण आभूषण/सिक्के (ख़रीदने हेतु), काले तिल, जल (पितृ तर्पण हेतु), कुश (दर्भ घास), नारियल, पुष्प, हल्दी-कुमकुम, दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती, पंचकज्जय, आम, दान सामग्री

अक्षय तृतीया पूजा विधि (कोंकणी — स्वर्ण-पितृ तर्पण)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ नमो नारायणाय । ॐ पितृभ्यो नमः । अक्षय फल दातारं — सर्व कार्यार्थ सिद्धिदम् ।

अक्षय तृतीया पूजा विधि (कोंकणी — स्वर्ण-पितृ तर्पण) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

अक्षय तृतीया से विष्णु/लक्ष्मी कृपा, शाश्वत समृद्धि (स्वर्ण), पितृ-तृप्ति, दान-पुण्य, कोंकणी तट पर तर्पण।

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