ज्येष्ठ अष्टमी — तुलमुल्ल पूजा विधि
ज्येष्ठ अष्टमी कश्मीरी पण्डितों का दूसरा सबसे बड़ा पर्व है। तुलमुल्ल (गान्दरबल) के पवित्र झरने पर माता रागन्या देवी का विशेष पूजन एवं मेला होता है। कश्मीर-घाटी से विस्थापित पण्डित जम्मू, दिल्ली एवं अन्य शहरों में भी इस दिन विशेष पूजा करते हैं। यह पर्व कश्मीरी पण्डित एकता एवं सांस्कृतिक अस्तित्व का प्रतीक है।
ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी (मई–जून, सप्तर्षि पञ्चाङ्ग)
प्रातःकाल — मध्याह्न तक, पूर्ण दिवस पूजन
Puja Samagri (Items Required)
- खीर (दूध-चावल-मिश्री)
- पुष्प माला, कमल
- कुमकुम, चन्दन, अक्षत
- हवन सामग्री (समिधा, घी, तिल)
- नारियल, फल, मिठाई
- दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर
Puja Procedure — Steps
स्नान एवं सज्जा
ज्येष्ठ अष्टमी प्रातःकाल स्नान करें। शुद्ध वस्त्र/नये वस्त्र धारण करें। ठोकुर कुठ (देवस्थान) की सफ़ाई करें। दीपक प्रज्वलित करें।
माता रागन्या पूजन
माता रागन्या की प्रतिमा/चित्र पर कुमकुम-चन्दन तिलक करें। पुष्प अर्पित करें। "ॐ ह्रीं रागन्यायै नमः" मन्त्र जपें। दीपक-अगरबत्ती अर्पित करें।
हवन एवं खीर अर्पण
हवन कुण्ड में अग्नि प्रज्वलित कर समिधा, घी, तिल, जौ की आहुतियाँ दें। माता को ताज़ी खीर अर्पित करें। नारियल फोड़ें।
नवीद वितरण एवं सामूहिक प्रार्थना
खीर एवं नवीद (प्रसाद) समुदाय में बाँटें। कश्मीरी पण्डित परिवारों के साथ सामूहिक प्रार्थना करें — कश्मीर-वापसी, परिवार की सुरक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण हेतु।
Main Mantra
ॐ ह्रीं रागन्यायै नमः । जय जय हे महारागन्ये । ॐ दुं दुर्गायै नमः ।
Benefits of this Puja
ज्येष्ठ अष्टमी पूजा से माता रागन्या की कृपा, सकल मनोरथ सिद्धि, परिवार की सुरक्षा, कश्मीरी पण्डित एकता एवं सांस्कृतिक अस्तित्व का बल।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्येष्ठ अष्टमी — तुलमुल्ल पूजा विधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी (मई–जून, सप्तर्षि पञ्चाङ्ग) — प्रातःकाल — मध्याह्न तक, पूर्ण दिवस पूजन
ज्येष्ठ अष्टमी — तुलमुल्ल पूजा विधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
खीर (दूध-चावल-मिश्री), पुष्प माला, कमल, कुमकुम, चन्दन, अक्षत, हवन सामग्री (समिधा, घी, तिल), नारियल, फल, मिठाई, दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर
ज्येष्ठ अष्टमी — तुलमुल्ल पूजा विधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ ह्रीं रागन्यायै नमः । जय जय हे महारागन्ये । ॐ दुं दुर्गायै नमः ।
ज्येष्ठ अष्टमी — तुलमुल्ल पूजा विधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
ज्येष्ठ अष्टमी पूजा से माता रागन्या की कृपा, सकल मनोरथ सिद्धि, परिवार की सुरक्षा, कश्मीरी पण्डित एकता एवं सांस्कृतिक अस्तित्व का बल।