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पितृ देव (पूर्वज)

उमासह — अमावस्या पूजा विधि (सिंधी)

Last updated: 14 June 2026

उमासह (अमावस्या) सिंधी हिंदुओं में पितृ पूजा का दिन है — हर महीने अमावस्या पर पूर्वजों को याद किया जाता है। इस दिन गौ माता को भोजन, गरीबों को दान, और तर्पण (जल अर्पण) किया जाता है। सिंधी परंपरा में पितरों की शांति के लिए विशेष भोजन बनाया जाता है।

Occasion

प्रत्येक माह — अमावस्या (12 बार/वर्ष)

Muhurat

प्रातःकाल — अमावस्या तिथि

Puja Samagri (Items Required)

  • तर्पण सामग्री
  • पितरों का भोजन
  • गौ माता का चारा
  • दान सामग्री
  • दीपक, अगरबत्ती

Puja Procedure — Steps

Step 1

स्नान & संकल्प

प्रातःकाल स्नान करें। संकल्प लें — "मैं अपने पितरों की शांति के लिए उमासह पूजा करता/करती हूं।"

Step 2

पितृ तर्पण

दक्षिण दिशा में मुख करके बैठें। तिल-जल-कुशा से पितरों को तर्पण (जल अर्पण) करें। "पितृभ्यः नमः" बोलें। तीन पीढ़ी तक के पितरों का नाम लें।

Step 3

गौ सेवा & दान

गौ माता को रोटी-चारा खिलाएं — पितरों की शांति के लिए। गरीबों को अनाज, वस्त्र, भोजन दान करें। कुत्तों और पक्षियों को भी भोजन डालें।

Step 4

भोजन & पलव

पितरों के लिए एक थाली अलग रखें — रोटी, सब्जी, दाल। पहले पितरों को भोग लगाएं, फिर परिवार खाए। पलव करें — पितरों की आत्मिक शांति की प्रार्थना।

Main Mantra

ओम पितृभ्यः स्वधायै नमः ।

पितरों की शांति हो, आत्मा को मोक्ष मिले ।

Benefits of this Puja

पितृ दोष निवारण, पूर्वजों की शांति, परिवार में सुख, कर्म शुद्धि।

Important Notes

• सिंधी में अमावस्या को "उमासह" कहते हैं। • गौ माता को भोजन — पितरों तक भोजन पहुंचने की मान्यता। • दक्षिण दिशा में मुख करके तर्पण — अनिवार्य। • हर महीने अमावस्या पर यह पूजा करनी चाहिए। • पितृ भोजन — एक थाली अलग से रखी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमासह — अमावस्या पूजा विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रत्येक माह — अमावस्या (12 बार/वर्ष) — प्रातःकाल — अमावस्या तिथि

उमासह — अमावस्या पूजा विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

तर्पण सामग्री, पितरों का भोजन, गौ माता का चारा, दान सामग्री, दीपक, अगरबत्ती

उमासह — अमावस्या पूजा विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ओम पितृभ्यः स्वधायै नमः । पितरों की शांति हो, आत्मा को मोक्ष मिले ।

उमासह — अमावस्या पूजा विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

पितृ दोष निवारण, पूर्वजों की शांति, परिवार में सुख, कर्म शुद्धि।

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