तर्पण / श्राद्ध विधि (कश्मीरी पण्डित)
कश्मीरी पण्डितों की तर्पण / श्राद्ध विधि पितरों (पूर्वजों) को जल-अन्न-तिल अर्पित कर उनकी तृप्ति हेतु की जाती है। पितृपक्ष (आश्विन कृष्ण पक्ष) में यह विधि विशेष रूप से की जाती है। कश्मीरी परम्परा में श्राद्ध की अपनी विशिष्ट शैली है — पुरोहित के साथ वैदिक मन्त्रोच्चारण, पिण्डदान, तिल-तर्पण, एवं ब्राह्मण भोजन।
पितृपक्ष (आश्विन कृष्ण पक्ष — सितम्बर-अक्तूबर), पितर की पुण्यतिथि
दोपहर / अपराह्न — पितर तिथि अनुसार
Puja Samagri (Items Required)
- काली तिल, यव (जौ)
- कुशा (दूब)
- जल-पात्र
- पिण्ड सामग्री
- दीपक, अगरबत्ती
- वस्त्र-दान सामग्री (ब्राह्मण हेतु)
- भोजन (ब्राह्मण भोजन हेतु)
Puja Procedure — Steps
तर्पण तैयारी
दक्षिण दिशा की ओर बैठें (पितर-दिशा)। कुशा (दूब) का आसन बिछाएँ। जल-पात्र में शुद्ध जल, काली तिल, यव (जौ) रखें। पुरोहित / स्वयं मन्त्रोच्चार हेतु तैयार हों।
तिल-तर्पण
दाहिने हाथ में कुशा रखें। जल में काली तिल-यव मिलाएँ। "ॐ ... (पितर का नाम) ... गोत्रस्य ... तृप्यतु" मन्त्र जपते हुए तिल-जल दक्षिण दिशा में अर्पित करें। तीन पीढ़ियों — पिता, पितामह (दादा), प्रपितामह (परदादा) — को तर्पण दें।
पिण्डदान
चावल, दाल, तिल, आटे को मिलाकर छोटे गोल पिण्ड बनाएँ। कुशा पर रखें। "ॐ स्वधा" मन्त्र जपें। तीन पिण्ड — तीन पीढ़ी हेतु। पिण्डदान पितरों की तृप्ति का प्रतीक है।
ब्राह्मण भोजन एवं दान
पिण्डदान पश्चात् ब्राह्मण को भोजन कराएँ। वस्त्र-दान, दक्षिणा दें। पितरों का आभार व्यक्त करें। नवीद (प्रसाद) बाँटें।
Main Mantra
ॐ पितृभ्यो नमः । ॐ स्वधा । ॐ ... (पितर नाम) ... गोत्रस्य ... तृप्यतु । ॐ ये चेह पितरो ये च नेह याँश्च विद्म याँश्चु न प्रविद्म ।
Benefits of this Puja
तर्पण / श्राद्ध से पितरों की तृप्ति, पितृ दोष निवारण, वंश-रक्षा, पारिवारिक शान्ति, पूर्वजों का आशीर्वाद।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तर्पण / श्राद्ध विधि (कश्मीरी पण्डित) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
पितृपक्ष (आश्विन कृष्ण पक्ष — सितम्बर-अक्तूबर), पितर की पुण्यतिथि — दोपहर / अपराह्न — पितर तिथि अनुसार
तर्पण / श्राद्ध विधि (कश्मीरी पण्डित) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
काली तिल, यव (जौ), कुशा (दूब), जल-पात्र, पिण्ड सामग्री, दीपक, अगरबत्ती, वस्त्र-दान सामग्री (ब्राह्मण हेतु), भोजन (ब्राह्मण भोजन हेतु)
तर्पण / श्राद्ध विधि (कश्मीरी पण्डित) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ पितृभ्यो नमः । ॐ स्वधा । ॐ ... (पितर नाम) ... गोत्रस्य ... तृप्यतु । ॐ ये चेह पितरो ये च नेह याँश्च विद्म याँश्चु न प्रविद्म ।
तर्पण / श्राद्ध विधि (कश्मीरी पण्डित) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
तर्पण / श्राद्ध से पितरों की तृप्ति, पितृ दोष निवारण, वंश-रक्षा, पारिवारिक शान्ति, पूर्वजों का आशीर्वाद।