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भगवान वरुण (समुद्र देवता) / सूर्य देवता

सुत्त पुनव / नालियेरी पूर्णिमा पूजा विधि (कोंकणी)

Last updated: 14 June 2026

सुत्त पुनव (श्रावण पूर्णिमा / रक्षा बन्धन) कोंकणी समुदाय में दो अनूठी परम्पराओं के लिए जाना जाता है — (1) "यज्ञोपवीत बदलना" (ब्राह्मण पुरुषों का जनेऊ बदलने का संस्कार), और (2) "नालियेरी पूर्णिमा" (सोने से रंगे नारियल समुद्र देवता वरुण को अर्पित करना)। तटीय कोंकणी संस्कृति में समुद्र = जीवन — अतः वरुण को नारियल अर्पण अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

Occasion

श्रावण पूर्णिमा (अगस्त)

Muhurat

प्रातःकाल — जनेऊ बदलना; सन्ध्या — नारियल अर्पण

Puja Samagri (Items Required)

  • नया यज्ञोपवीत (जनेऊ
  • सोने से रंगा नारियल (नालियेरी)
  • कुमकुम, हल्दी, चन्दन, अक्षत
  • पुष्प, दूर्वा, तुलसी
  • राखी (बहन हेतु)
  • दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती

Puja Procedure — Steps

Step 1

यज्ञोपवीत बदलना

ब्राह्मण पुरुष प्रातःकाल स्नान करें। पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) निकालें। गायत्री मन्त्र जपते हुए नया यज्ञोपवीत धारण करें — "ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रम्..."। पुराना जनेऊ तुलसी वृक्ष पर बाँधें या जल में विसर्जित करें।

Step 2

नालियेरी पूर्णिमा — समुद्र पूजा

सोने की पन्नी/रंग से नारियल सजाएँ। समुद्र तट पर जाएँ। भगवान वरुण (समुद्र देवता) को प्रणाम करें। "ॐ वरुणाय नमः" जपें। सजा हुआ नारियल समुद्र में अर्पित करें (प्रक्षेपित करें)। मछुआरों/नाविकों की सुरक्षा हेतु प्रार्थना।

Step 3

राखी बन्धन

बहनें भाइयों को राखी बाँधें। कुमकुम-अक्षत तिलक लगाएँ। मिठाई खिलाएँ। भाई बहनों को उपहार/दक्षिणा दें। कोंकणी परम्परा में नारियल-गुड़ लाडू विशेष प्रसाद।

Step 4

नैवेद्य एवं उत्सव

पंचकज्जय, नारियल-गुड़ लाडू, पायसम नैवेद्य अर्पित करें। परिवार एकत्र होकर भोजन करे। समुद्र-तट पर सामुदायिक उत्सव — ढोल-ताशे, नृत्य।

Main Mantra

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात् ।

ॐ वरुणाय नमः ।

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।

Benefits of this Puja

सुत्त पुनव से यज्ञोपवीत शुद्धि, समुद्र देवता वरुण की कृपा, भाई-बहन का बन्धन, मछुआरों/नाविकों की सुरक्षा, कोंकणी तटीय संस्कृति।

Important Notes

• सुत्त पुनव = श्रावण पूर्णिमा — जनेऊ बदलना अनिवार्य (ब्राह्मण)। • नालियेरी पूर्णिमा = समुद्र को सोने का नारियल — तटीय कोंकणी विशेष। • समुद्र = कोंकणी जीवन — वरुण पूजा अनिवार्य। • राखी + जनेऊ + नारियल = तीन परम्पराएँ एक दिन। • गोवा/कर्नाटक तट पर विशाल उत्सव।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

सुत्त पुनव / नालियेरी पूर्णिमा पूजा विधि (कोंकणी) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

श्रावण पूर्णिमा (अगस्त) — प्रातःकाल — जनेऊ बदलना; सन्ध्या — नारियल अर्पण

सुत्त पुनव / नालियेरी पूर्णिमा पूजा विधि (कोंकणी) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

नया यज्ञोपवीत (जनेऊ, सोने से रंगा नारियल (नालियेरी), कुमकुम, हल्दी, चन्दन, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, तुलसी, राखी (बहन हेतु), दीपक (नारियल तेल), अगरबत्ती

सुत्त पुनव / नालियेरी पूर्णिमा पूजा विधि (कोंकणी)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात् । ॐ वरुणाय नमः । ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।

सुत्त पुनव / नालियेरी पूर्णिमा पूजा विधि (कोंकणी) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

सुत्त पुनव से यज्ञोपवीत शुद्धि, समुद्र देवता वरुण की कृपा, भाई-बहन का बन्धन, मछुआरों/नाविकों की सुरक्षा, कोंकणी तटीय संस्कृति।

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