Skip to content
← Pooja Vidhi
माता सरस्वती / भगवान शिव (वसन्त रूप)
माता सरस्वती / भगवान शिव (वसन्त रूप)

सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव)

Last updated: 14 June 2026

सोंठ (सोन) कश्मीरी पण्डितों का वसन्तोत्सव है — बसन्त पञ्चमी के समान। चैत्र मास में मनाया जाता है। इस दिन "थाली" सजाई जाती है (नवरेह के समान) जिसमें चावल, पुष्प, हरी पत्तियाँ रखी जाती हैं — वसन्त ऋतु के आगमन का स्वागत। कश्मीर-घाटी में बादाम के वृक्षों पर फूल आने का यह समय विशेष माना जाता है।

Occasion

चैत्र मास (मार्च–अप्रैल, सप्तर्षि पञ्चाङ्ग)

Muhurat

प्रातःकाल — थाली दर्शन एवं पूजन

Puja Samagri (Items Required)

  • थाली (चावल, पुष्प, हरी पत्तियाँ)
  • बादाम के फूल / वसन्त पुष्प
  • दही, मिश्री, अखरोट
  • कुमकुम, चन्दन, अक्षत
  • दीपक, अगरबत्ती
  • हवन सामग्री (वैकल्पिक)

Puja Procedure — Steps

Step 1

थाली सजाना

एक बड़ी थाली में चावल फैलाएँ। उस पर वसन्त पुष्प (बादाम के फूल, गेन्दा, नर्गिस), हरी पत्तियाँ, दही का कटोरा, अखरोट, मिश्री रखें। यह वसन्त ऋतु का स्वागत-थाली है।

Step 2

वसन्त पूजन

ठोकुर कुठ में दीपक-अगरबत्ती जलाएँ। माता सरस्वती / भगवान शिव को पुष्प, अक्षत अर्पित करें। "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" जपें। वसन्त ऋतु के आगमन हेतु कृतज्ञता व्यक्त करें।

Step 3

प्रकृति से जुड़ाव

बाग-बगीचे में जाएँ — बादाम, चिनार के वृक्ष देखें। बच्चों को कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य के विषय में बताएँ। हरी पत्तियाँ, पुष्प घर लाएँ।

Step 4

नवीद एवं उत्सव

नवीद (प्रसाद) — मिश्री, अखरोट, सूखे मेवे — बाँटें। विशेष कश्मीरी भोजन बनाएँ। परिवार के साथ वसन्त का आनन्द मनाएँ।

Main Mantra

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

ॐ नमः शिवाय ।

मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः ।

Benefits of this Puja

सोंठ पूजा से वसन्त ऋतु का शुभ आगमन, विद्या-कला में उन्नति, प्रकृति से जुड़ाव, कश्मीर-घाटी की सांस्कृतिक स्मृति।

Important Notes

• सोंठ = कश्मीरी वसन्तोत्सव — बसन्त पञ्चमी जैसा। • थाली सजाना अनिवार्य — नवरेह शैली। • बादाम के फूल = कश्मीर की वसन्त-पहचान। • बच्चों को कश्मीर के प्रकृति-सौन्दर्य से जोड़ें। • प्रवासी पण्डित भी स्थानीय वसन्त-पुष्पों से थाली सजाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

चैत्र मास (मार्च–अप्रैल, सप्तर्षि पञ्चाङ्ग) — प्रातःकाल — थाली दर्शन एवं पूजन

सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

थाली (चावल, पुष्प, हरी पत्तियाँ), बादाम के फूल / वसन्त पुष्प, दही, मिश्री, अखरोट, कुमकुम, चन्दन, अक्षत, दीपक, अगरबत्ती, हवन सामग्री (वैकल्पिक)

सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । ॐ नमः शिवाय । मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः ।

सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

सोंठ पूजा से वसन्त ऋतु का शुभ आगमन, विद्या-कला में उन्नति, प्रकृति से जुड़ाव, कश्मीर-घाटी की सांस्कृतिक स्मृति।

What to do next

← View all Pooja Vidhis

Recently Accessed

Home

Premium Tools

View All →

Trending Topics

Continue Your Spiritual Journey

Explore related Hindu wisdom, daily guidance, and AI-powered answers on VedKosh.

Independently reviewed for authenticity. Please verify meanings and rituals yourself before following. Not medical, legal or financial advice.

सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) — Complete Guide | VedKosh