
सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव)
सोंठ (सोन) कश्मीरी पण्डितों का वसन्तोत्सव है — बसन्त पञ्चमी के समान। चैत्र मास में मनाया जाता है। इस दिन "थाली" सजाई जाती है (नवरेह के समान) जिसमें चावल, पुष्प, हरी पत्तियाँ रखी जाती हैं — वसन्त ऋतु के आगमन का स्वागत। कश्मीर-घाटी में बादाम के वृक्षों पर फूल आने का यह समय विशेष माना जाता है।
चैत्र मास (मार्च–अप्रैल, सप्तर्षि पञ्चाङ्ग)
प्रातःकाल — थाली दर्शन एवं पूजन
Puja Samagri (Items Required)
- थाली (चावल, पुष्प, हरी पत्तियाँ)
- बादाम के फूल / वसन्त पुष्प
- दही, मिश्री, अखरोट
- कुमकुम, चन्दन, अक्षत
- दीपक, अगरबत्ती
- हवन सामग्री (वैकल्पिक)
Puja Procedure — Steps
थाली सजाना
एक बड़ी थाली में चावल फैलाएँ। उस पर वसन्त पुष्प (बादाम के फूल, गेन्दा, नर्गिस), हरी पत्तियाँ, दही का कटोरा, अखरोट, मिश्री रखें। यह वसन्त ऋतु का स्वागत-थाली है।
वसन्त पूजन
ठोकुर कुठ में दीपक-अगरबत्ती जलाएँ। माता सरस्वती / भगवान शिव को पुष्प, अक्षत अर्पित करें। "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" जपें। वसन्त ऋतु के आगमन हेतु कृतज्ञता व्यक्त करें।
प्रकृति से जुड़ाव
बाग-बगीचे में जाएँ — बादाम, चिनार के वृक्ष देखें। बच्चों को कश्मीर के प्राकृतिक सौन्दर्य के विषय में बताएँ। हरी पत्तियाँ, पुष्प घर लाएँ।
नवीद एवं उत्सव
नवीद (प्रसाद) — मिश्री, अखरोट, सूखे मेवे — बाँटें। विशेष कश्मीरी भोजन बनाएँ। परिवार के साथ वसन्त का आनन्द मनाएँ।
Main Mantra
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । ॐ नमः शिवाय । मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः ।
Benefits of this Puja
सोंठ पूजा से वसन्त ऋतु का शुभ आगमन, विद्या-कला में उन्नति, प्रकृति से जुड़ाव, कश्मीर-घाटी की सांस्कृतिक स्मृति।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
चैत्र मास (मार्च–अप्रैल, सप्तर्षि पञ्चाङ्ग) — प्रातःकाल — थाली दर्शन एवं पूजन
सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
थाली (चावल, पुष्प, हरी पत्तियाँ), बादाम के फूल / वसन्त पुष्प, दही, मिश्री, अखरोट, कुमकुम, चन्दन, अक्षत, दीपक, अगरबत्ती, हवन सामग्री (वैकल्पिक)
सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । ॐ नमः शिवाय । मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः ।
सोंठ पूजा विधि (कश्मीरी वसन्तोत्सव) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
सोंठ पूजा से वसन्त ऋतु का शुभ आगमन, विद्या-कला में उन्नति, प्रकृति से जुड़ाव, कश्मीर-घाटी की सांस्कृतिक स्मृति।