सामा चकेवा पूजा विधि (मिथिला — भाई-बहन पर्व)
सामा चकेवा मिथिला का अनूठा भाई-बहन पर्व — कार्तिक मास में मनाया जाता है। बहनें मिट्टी की सामा-चकेवा (पक्षी) मूर्तियाँ बनाती हैं। सामा = कृष्ण की पुत्री श्यामा, चकेवा = चकवा पक्षी। भाई सामा को विदा करता है। लोकगीत गाए जाते हैं। अन्तिम दिन मूर्तियाँ तोड़कर विसर्जित। भाई-बहन प्रेम का उत्सव।
कार्तिक मास — शुक्ल सप्तमी से पूर्णिमा (अक्टूबर–नवम्बर)
सन्ध्या — प्रतिदिन गीत एवं पूजा
Puja Samagri (Items Required)
- मिट्टी (सामा-चकेवा मूर्ति हेतु)
- रंग (मूर्ति सजावट)
- पुष्प, दूर्वा
- अक्षत (चावल), हल्दी
- घी दीपक, अगरबत्ती
- फल, मिठाई
Puja Procedure — Steps
मूर्ति निर्माण
बहनें मिट्टी से सामा (पक्षी), चकेवा, चुगला (खलनायक) आदि मूर्तियाँ बनाएँ। रंगों से सजाएँ। अरिपन बनाएँ।
सन्ध्या गीत एवं पूजा
प्रतिदिन सन्ध्या को सामा-चकेवा लोकगीत गाएँ — मिथिला की अनूठी परम्परा। मूर्तियों को पुष्प, अक्षत अर्पित। दीपक जलाएँ।
भाई-बहन अनुष्ठान
भाई बहन की सामा मूर्ति को प्रणाम करे। बहन भाई को तिलक लगाए। लोकगीतों में भाई-बहन प्रेम कथा।
विसर्जन — सामा विदाई
अन्तिम दिन (पूर्णिमा) — भाई सामा मूर्ति तोड़कर/विसर्जित करे। "सामा विदाई" — भावनात्मक क्षण। बहनें गीत गाएँ। प्रसाद बाँटें।
Main Mantra
सामा रे सामा, चकेवा रे चकेवा । भाई-बहन प्रेम अमर रहे ।
Benefits of this Puja
भाई-बहन प्रेम, पारिवारिक बन्धन, मिथिला लोक-कला संरक्षण, सामा-चकेवा कथा — कृष्ण परिवार आशीर्वाद।
Important Notes
बेर-बेर पुछल जाएबला प्रश्न
सामा चकेवा पूजा विधि (मिथिला — भाई-बहन पर्व) कहिया कएल जाइत अछि आ शुभ मुहूर्त की अछि?
कार्तिक मास — शुक्ल सप्तमी से पूर्णिमा (अक्टूबर–नवम्बर) — सन्ध्या — प्रतिदिन गीत एवं पूजा
सामा चकेवा पूजा विधि (मिथिला — भाई-बहन पर्व) लेल कोन पूजा सामग्री चाही?
मिट्टी (सामा-चकेवा मूर्ति हेतु), रंग (मूर्ति सजावट), पुष्प, दूर्वा, अक्षत (चावल), हल्दी, घी दीपक, अगरबत्ती, फल, मिठाई
सामा चकेवा पूजा विधि (मिथिला — भाई-बहन पर्व) मे कोन मंत्र जपल जाइत अछि?
सामा रे सामा, चकेवा रे चकेवा । भाई-बहन प्रेम अमर रहे ।
सामा चकेवा पूजा विधि (मिथिला — भाई-बहन पर्व) करबा सँ की लाभ भेटैत अछि?
भाई-बहन प्रेम, पारिवारिक बन्धन, मिथिला लोक-कला संरक्षण, सामा-चकेवा कथा — कृष्ण परिवार आशीर्वाद।