
सकरात / खिचड़ी (मकर संक्रांति) बिधि
सकरात (मकर संक्रांति) भोजपुरी इलाका में "खिचड़ी" के नाम से मनावल जाला। दही-चिउड़ा, तिल-गुड़ के लड्डू (तिलवा), खिचड़ी भोग, गंगा स्नान आ दान-पुण्य — ई सब सिरिस्ता बा। "तिल संक्रांत" के दिन तिल के सामान दान कइल बहुत शुभ बा। पतंग उड़ावल आ ताजा फसल के उत्सव भी ई दिन मनावल जाला।
मकर संक्रांति — पौष/माघ (14 जनवरी)
सबेरे — सूर्योदय से दोपहर तक
Puja Samagri (Items Required)
- तिल, गुड़
- दही, चिउड़ा (चूड़ा)
- खिचड़ी सामग्री: चावल, दाल, हल्दी, घी
- तिलवा (तिल-गुड़ लड्डू)
- गंगाजल / जल
- दान सामग्री: कंबल, अनाज, तिल
Puja Procedure — Steps
सबेरे गंगा/नदी स्नान
सबेरे गंगा या नजदीकी नदी में स्नान करीं। माघ मेला (प्रयागराज) में स्नान सबसे पुण्यकारी बा।
सूर्य अर्घ्य
सूर्यदेव के जल चढ़ाईं। "ॐ सूर्याय नमः" जप करीं। तिल-जल अर्पित करीं।
दही-चिउड़ा आ तिलवा
सबेरे दही-चिउड़ा (चूड़ा) खाईं। तिल-गुड़ के लड्डू (तिलवा) बनाईं आ बँटाईं।
खिचड़ी भोग आ दान
दोपहर में खिचड़ी बना के सूर्यदेव के भोग लगाईं। गरीब लोग के कंबल, अनाज, तिल दान करीं।
Main Mantra
ॐ सूर्याय नमः। तिल-तिल के पुण्य बा, सकरात के दिन बा। दही-चूड़ा, तिलवा खाईं, खिचड़ी के भोग लगाईं!
Benefits of this Puja
सकरात (खिचड़ी) से सूर्यदेव के कृपा, पापनाश, स्वास्थ्य लाभ, कृषि समृद्धि आ दान के पुण्य मिलेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सकरात / खिचड़ी (मकर संक्रांति) बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
मकर संक्रांति — पौष/माघ (14 जनवरी) — सबेरे — सूर्योदय से दोपहर तक
सकरात / खिचड़ी (मकर संक्रांति) बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
तिल, गुड़, दही, चिउड़ा (चूड़ा), खिचड़ी सामग्री: चावल, दाल, हल्दी, घी, तिलवा (तिल-गुड़ लड्डू), गंगाजल / जल, दान सामग्री: कंबल, अनाज, तिल
सकरात / खिचड़ी (मकर संक्रांति) बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ सूर्याय नमः। तिल-तिल के पुण्य बा, सकरात के दिन बा। दही-चूड़ा, तिलवा खाईं, खिचड़ी के भोग लगाईं!
सकरात / खिचड़ी (मकर संक्रांति) बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
सकरात (खिचड़ी) से सूर्यदेव के कृपा, पापनाश, स्वास्थ्य लाभ, कृषि समृद्धि आ दान के पुण्य मिलेला।