पिड़िया पर्व बिधि
पिड़िया भोजपुरी इलाका के एक अनूठा पर्व बा जवना में बहिन एक महीना तक (कार्तिक माह) हर दिन दीया जरा के भइया खातिर प्रार्थना करेली। ई पर्व यमुना आ यमराज के कथा पर आधारित बा। बहिन हर शाम पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे दीया धर के गीत गावेली।
कार्तिक माह — पूरा एक महीना (अक्टूबर–नवंबर)
हर संझा — सूर्यास्त के बेर
Puja Samagri (Items Required)
- मिट्टी के छोटकी पिड़िया (दीया)
- सरसों के तेल
- बाती (कपास के)
- फूल, अक्षत
- फल
Puja Procedure — Steps
दीया तइयारी
हर दिन एक नया मिट्टी के दीया (पिड़िया) सरसों के तेल आ बाती से तइयार करीं।
संझा में दीया जरावल
संझा के बेर पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे जा के दीया जराईं। भइया के नाम ले के प्रार्थना करीं।
पिड़िया गीत
दीया जरावे के बेर पिड़िया के लोकगीत गाईं। गीत में यमुना-यमराज के कथा आ भाई-बहिन के प्रेम बा।
महीना भर पालन
पूरा कार्तिक माह रोज बिना नागा दीया जराईं। आखिरी दिन भइया के तिलक लगा के आशीर्वाद दीं।
Main Mantra
पिड़िया जरावतानी हो भइया, तोहरा दुआरे दीया बारतानी। यमुना जइसन बहिनी के प्रेम, यमराज जइसन भइया के नेम!
Benefits of this Puja
पिड़िया पर्व से भइया के दीर्घायु, सुरक्षा, यमराज के भय से मुक्ति आ भाई-बहिन के बंधन मजबूत होला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पिड़िया पर्व बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
कार्तिक माह — पूरा एक महीना (अक्टूबर–नवंबर) — हर संझा — सूर्यास्त के बेर
पिड़िया पर्व बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
मिट्टी के छोटकी पिड़िया (दीया), सरसों के तेल, बाती (कपास के), फूल, अक्षत, फल
पिड़िया पर्व बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
पिड़िया जरावतानी हो भइया, तोहरा दुआरे दीया बारतानी। यमुना जइसन बहिनी के प्रेम, यमराज जइसन भइया के नेम!
पिड़िया पर्व बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
पिड़िया पर्व से भइया के दीर्घायु, सुरक्षा, यमराज के भय से मुक्ति आ भाई-बहिन के बंधन मजबूत होला।