
नंदी और वड्डी थद्री पूजा विधि (सिंधी)
नंदी (छोटी) थद्री और वड्डी (बड़ी) थद्री सावन महीने में मनाई जाने वाली सिंधी परंपराएं हैं। दोनों दिन रसोई में आग नहीं जलाई जाती — ठंडा बासी भोजन खाया जाता है। नंदी थद्री छोटी होती है और वड्डी थद्री बड़ी — दोनों शीतला माता को समर्पित हैं।
सावन (श्रावण) मास — दो अलग-अलग दिन
प्रातःकाल — शीतला माता पूजा
Puja Samagri (Items Required)
- लोला
- मणी
- दही, लस्सी, ठंडा दूध
- शीतला माता मूर्ति/तस्वीर
- ठंडा जल, पुष्प
Puja Procedure — Steps
पूर्व संध्या — भोजन तैयारी
एक दिन पहले सारा भोजन बनाएं: लोला (मीठी रोटी), सब्जी, दाल, चावल। अगले दिन चूल्हा नहीं जलाना है।
शीतला माता पूजा
प्रातःकाल शीतला माता को ठंडा जल, दही अर्पित करें। पुष्प चढ़ाएं। "ओम शीतलायै नमः" जाप करें। नंदी थद्री पर सादी पूजा, वड्डी थद्री पर विस्तृत पूजा।
ठंडा भोजन
परिवार मिलकर ठंडा भोजन (लोला, मणी, दही-लस्सी) खाएं। गर्म भोजन बनाना/खाना सख्त मना। वड्डी थद्री पर विशेष सिंधी व्यंजन बनते हैं।
पलव & प्रसाद
शीतला माता के सामने पलव करें। लोला और दही का प्रसाद पड़ोसियों-रिश्तेदारों को बांटें।
Main Mantra
ओम शीतलायै नमः । नंदी-वड्डी थद्री आई, शीतला माता ठंडक लाई ।
Benefits of this Puja
शीतला माता कृपा, रोग निवारण, गर्मी से राहत, शांति।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नंदी और वड्डी थद्री पूजा विधि (सिंधी) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
सावन (श्रावण) मास — दो अलग-अलग दिन — प्रातःकाल — शीतला माता पूजा
नंदी और वड्डी थद्री पूजा विधि (सिंधी) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
लोला, मणी, दही, लस्सी, ठंडा दूध, शीतला माता मूर्ति/तस्वीर, ठंडा जल, पुष्प
नंदी और वड्डी थद्री पूजा विधि (सिंधी) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ओम शीतलायै नमः । नंदी-वड्डी थद्री आई, शीतला माता ठंडक लाई ।
नंदी और वड्डी थद्री पूजा विधि (सिंधी) करने से क्या लाभ मिलते हैं?
शीतला माता कृपा, रोग निवारण, गर्मी से राहत, शांति।