मुंडन संस्कार बिधि
मुंडन संस्कार (चूड़ाकरण) भोजपुरी इलाका में लइका (बच्चा) के पहिला केस काटे के बहुत बड़ संस्कार बा। बियाह जइसन बड़ आयोजन कइल जाला — नेवता (निमंत्रण), भोज, बैंड-बाजा, नाई के पूजा, कुलदेवता पूजा, तीर्थ यात्रा (विंध्यवासिनी/बनारस) — सब सामिल बा। भोजपुरी परंपरा में मुंडन बहुत भावुक आ पवित्र अनुष्ठान बा।
लइका के 1 या 3 या 5 साल में (विषम उम्र), शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त — ज्योतिषी से पूछ के
Puja Samagri (Items Required)
- नाई (हजाम) के सामान
- हल्दी, चावल, दूध, दही
- नया कपड़ा (लइका खातिर)
- फूल, माला, तिलक सामग्री
- नेवता (निमंत्रण पत्र)
- भोज सामग्री
- दक्षिणा (नाई, पंडित)
Puja Procedure — Steps
तैयारी आ नेवता
ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त तय करीं। रिश्तेदार आ गाँव-मोहल्ला के नेवता दीं। बैंड-बाजा के इंतज़ाम करीं।
कुलदेवता पूजा
मुंडन से पहिले कुलदेवता (परिवार के देवता) के पूजा करीं। संकल्प लीं। दीया-धूप जराईं।
मुंडन
नाई (हजाम) लइका के केस काटेले। माई-बाबूजी लइका के गोदी में बइठावेले। पहिला बाल काटे के बेर "ॐ" बोलल जाला। हल्दी-दूध लइका के माथा पर लगावल जाला।
भोज, दक्षिणा आ आशीर्वाद
सबके भोज कराईं — पूरी, कचौड़ी, सब्जी, खीर, मीठाई। नाई आ पंडित जी के दक्षिणा दीं। बड़-बुजुर्ग लइका के आशीर्वाद देले।
Main Mantra
ॐ केशिन्यग्ने कृण्वन्तु यज्ञपत्नीश्च, नमोऽस्तु कुलदेवताभ्यः। बाबा-दादा के आशीर्वाद बा लइका सुखी रहे आ तरक्की करे!
Benefits of this Puja
मुंडन संस्कार से लइका के स्वस्थ विकास, कुलदेवता के आशीर्वाद, बुरी नज़र से रक्षा आ शारीरिक-मानसिक शुद्धि होला। ई षोडश संस्कार में से एक बा।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुंडन संस्कार बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
लइका के 1 या 3 या 5 साल में (विषम उम्र), शुभ मुहूर्त — शुभ मुहूर्त — ज्योतिषी से पूछ के
मुंडन संस्कार बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
नाई (हजाम) के सामान, हल्दी, चावल, दूध, दही, नया कपड़ा (लइका खातिर), फूल, माला, तिलक सामग्री, नेवता (निमंत्रण पत्र), भोज सामग्री, दक्षिणा (नाई, पंडित)
मुंडन संस्कार बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
ॐ केशिन्यग्ने कृण्वन्तु यज्ञपत्नीश्च, नमोऽस्तु कुलदेवताभ्यः। बाबा-दादा के आशीर्वाद बा लइका सुखी रहे आ तरक्की करे!
मुंडन संस्कार बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
मुंडन संस्कार से लइका के स्वस्थ विकास, कुलदेवता के आशीर्वाद, बुरी नज़र से रक्षा आ शारीरिक-मानसिक शुद्धि होला। ई षोडश संस्कार में से एक बा।