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नाग देवता (सर्प देव) एवं गौरी-शंकर

मधुश्रावणी पूजा विधि (मिथिला — नवविवाहिता 13-दिन व्रत)

Last updated: 4 September 2026

मधुश्रावणी मिथिला की अनूठी 13-दिवसीय परम्परा है — नवविवाहिता वधू द्वारा नाग देवताओं की पूजा। "तेमी दगाई" विशेष अनुष्ठान — मिट्टी के नागों को मंच पर स्थापित करना। वधू प्रतिदिन एक अलग कथा सुनती है — 13 कथाएँ। श्रावण मास में। वधू पति की दीर्घायु हेतु पूजा करती है। प्रतिदिन अरिपन। अन्तिम दिन नाग मूर्तियों का विसर्जन।

Occasion

श्रावण मास — नागपञ्चमी से 13 दिन (जुलाई–अगस्त)

Muhurat

प्रातःकाल — प्रतिदिन नाग पूजा

Puja Samagri (Items Required)

  • मिट्टी के नाग (सर्प मूर्ति)
  • तेमी दगाई मंच (पूजा वेदी)
  • पुष्प, हल्दी, सिन्दूर
  • दूर्वा, दूध
  • चावल, फल, अगरबत्ती
  • घी का दीपक
  • अरिपन पाउडर
  • नव वस्त्र (अर्पण हेतु)

Puja Procedure — Steps

Step 1

तेमी दगाई स्थापना

प्रथम दिन — मिट्टी के नाग बनाएँ एवं तेमी दगाई मंच पर स्थापित करें। अरिपन डिज़ाइन बनाएँ। पुष्प, दूर्वा, दूध, हल्दी से मंच सजाएँ। नवविवाहिता वधू स्वच्छ वस्त्र पहने।

Step 2

प्रतिदिन नाग पूजा

13 दिनों तक प्रतिदिन नाग देवता की पूजा — दूध, पुष्प, सिन्दूर, हल्दी अर्पित। प्रत्येक दिन नया अरिपन। घी का दीपक जलाएँ। "ॐ नागदेवताभ्यो नमः" — प्रतिदिन।

Step 3

कथा श्रवण

प्रतिदिन एक नई कथा — 13 दिनों में 13 भिन्न नाग देवता कथाएँ। पति दीर्घायु, दाम्पत्य सुख, नाग कृपा सम्बन्धित। बड़ी महिलाएँ / सास कथा सुनाएँ।

Step 4

विसर्जन

तेरहवें दिन — नाग मूर्तियों का जलाशय में विसर्जन। परिवार घाट पर जाए। "ॐ अनन्ताय नमः" जपते हुए मूर्तियाँ जल में प्रवाहित। उत्सव एवं प्रसाद वितरण।

Main Mantra

ॐ नागदेवताभ्यो नमः ।

ॐ अनन्ताय नमः ।

ॐ गौरी-शंकराभ्यां नमः ।

Benefits of this Puja

पति की दीर्घायु, नव-दम्पत्ति सुख, नाग देवता कृपा, मिथिला की अनूठी परम्परा, सर्प-दोष निवारण।

Important Notes

• मधुश्रावणी = नवविवाहिता का 13-दिवसीय नाग व्रत — मिथिला विशेष। • तेमी दगाई = मिट्टी के नाग — पूजा मंच। • 13 कथाएँ = प्रतिदिन भिन्न। • अरिपन = प्रतिदिन नया। • विसर्जन = अन्तिम दिन — जलाशय में।

बेर-बेर पुछल जाएबला प्रश्न

मधुश्रावणी पूजा विधि (मिथिला — नवविवाहिता 13-दिन व्रत) कहिया कएल जाइत अछि आ शुभ मुहूर्त की अछि?

श्रावण मास — नागपञ्चमी से 13 दिन (जुलाई–अगस्त) — प्रातःकाल — प्रतिदिन नाग पूजा

मधुश्रावणी पूजा विधि (मिथिला — नवविवाहिता 13-दिन व्रत) लेल कोन पूजा सामग्री चाही?

मिट्टी के नाग (सर्प मूर्ति), तेमी दगाई मंच (पूजा वेदी), पुष्प, हल्दी, सिन्दूर, दूर्वा, दूध, चावल, फल, अगरबत्ती, घी का दीपक, अरिपन पाउडर, नव वस्त्र (अर्पण हेतु)

मधुश्रावणी पूजा विधि (मिथिला — नवविवाहिता 13-दिन व्रत) मे कोन मंत्र जपल जाइत अछि?

ॐ नागदेवताभ्यो नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ गौरी-शंकराभ्यां नमः ।

मधुश्रावणी पूजा विधि (मिथिला — नवविवाहिता 13-दिन व्रत) करबा सँ की लाभ भेटैत अछि?

पति की दीर्घायु, नव-दम्पत्ति सुख, नाग देवता कृपा, मिथिला की अनूठी परम्परा, सर्प-दोष निवारण।

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