जीऊतिया (जितिया) व्रत बिधि
जितिया व्रत भोजपुरी आ मैथिली इलाका में माई लोग अपना बच्चन के दीर्घायु खातिर रखेली। ई तीन दिन के व्रत बा — नहाय-खाय, निर्जला उपवास आ पारन। कवनो माई एतना कड़ा व्रत अपना लइकन के रक्षा खातिर करेली — ई भोजपुरी लोक-परंपरा के सबसे भावुक पर्व बा।
आश्विन कृष्ण अष्टमी (सितंबर–अक्टूबर)
अष्टमी तिथि — भोर से भोर (24 घंटा+ निर्जला)
Puja Samagri (Items Required)
- नोनी (मड़ुआ/मरुवा) के रोटी
- मचिया (छोटकी पीढ़ी)
- जीमूतवाहन के कथा पुस्तक
- फल, दूध
- सिकी (सिक्की) के सामान
- दीया, अगरबत्ती
Puja Procedure — Steps
नहाय-खाय — पहिला दिन
व्रती (माई) सबेरे नहा-धो के नोनी (मड़ुआ) के रोटी, सात्विक भोजन बनावेली आ खाइली। बच्चन के खातिर प्रार्थना करेली। एकरा बाद दूसरा दिन के निर्जला उपवास शुरू होला।
निर्जला उपवास — दूसरा दिन
पूरा दिन-रात बिना पानी-खाना के उपवास। जीमूतवाहन के कथा सुनल जाला। माई लोग अपना बच्चन के लंबी उमर खातिर प्रार्थना करेली। ई सबसे कठिन दिन बा।
जितिया गीत
व्रती माई लोग जितिया के लोकगीत गावेली। गीत में बच्चन के रक्षा, माई के ममता आ जीमूतवाहन के कथा बा। ई गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलल आवत बा।
पारन — तीसरा दिन
नवमी तिथि के सबेरे पारन (उपवास तोड़ना) कइल जाला। नोनी (मड़ुआ) के रोटी आ फल से पारन करेली। बच्चन के माथा पर तिलक लगा के आशीर्वाद दिहल जाला।
Main Mantra
जीमूतवाहन महाराज के जय! जितिया माता के जय! हमार लइकन के उमर लंबी होखे, रोग-दोष दूर होखे।
Benefits of this Puja
जितिया व्रत से बच्चन के दीर्घायु, स्वस्थ जीवन, विपत्ति से रक्षा आ माई-बच्चा के बंधन मजबूत होला। जीमूतवाहन के कृपा से परिवार में सुख आवेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जीऊतिया (जितिया) व्रत बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
आश्विन कृष्ण अष्टमी (सितंबर–अक्टूबर) — अष्टमी तिथि — भोर से भोर (24 घंटा+ निर्जला)
जीऊतिया (जितिया) व्रत बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
नोनी (मड़ुआ/मरुवा) के रोटी, मचिया (छोटकी पीढ़ी), जीमूतवाहन के कथा पुस्तक, फल, दूध, सिकी (सिक्की) के सामान, दीया, अगरबत्ती
जीऊतिया (जितिया) व्रत बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
जीमूतवाहन महाराज के जय! जितिया माता के जय! हमार लइकन के उमर लंबी होखे, रोग-दोष दूर होखे।
जीऊतिया (जितिया) व्रत बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
जितिया व्रत से बच्चन के दीर्घायु, स्वस्थ जीवन, विपत्ति से रक्षा आ माई-बच्चा के बंधन मजबूत होला। जीमूतवाहन के कृपा से परिवार में सुख आवेला।