जितिया / जीमूतवाहन व्रत विधि (मिथिला)
जितिया — माताओं का सन्तान दीर्घायु हेतु 36 घण्टे निर्जला व्रत। तीन चरण: नहाय-खाय, खुर-जितिया (मुख्य व्रत), पारण। पारण में "मड़ुआ की रोटी" एवं "नोनी का साग"। जीमूतवाहन कथा — गन्धर्व राजा ने सर्प के शिकार को बचाने हेतु बलिदान दिया। दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, मुज़फ़्फ़रपुर में अत्यन्त लोकप्रिय।
आश्विन कृष्ण अष्टमी — तीन दिवसीय व्रत (सितम्बर–अक्टूबर)
नहाय-खाय = प्रथम दिन; खुर-जितिया = 36 घण्टे निर्जला; पारण = तृतीय दिन
Puja Samagri (Items Required)
- मड़ुआ (रागी) आटा
- नोनी साग
- जितिया का धागा
- फल, घी दीपक
- हल्दी, सिन्दूर
- अरिपन पाउडर
- चावल, पुष्प, अगरबत्ती
- दूध, जल (पारण हेतु)
Puja Procedure — Steps
नहाय-खाय
प्रथम दिन — स्नान एवं भोजन (चावल/दाल/सब्ज़ी)। व्रत तैयारी। अरिपन बनाएँ। जितिया धागा तैयार रखें।
खुर-जितिया — निर्जला व्रत
मुख्य दिवस — 36 घण्टे बिना भोजन-जल। माताएँ सन्तान दीर्घायु हेतु प्रार्थना। जितिया धागा बाँह पर बाँधें। दीपक जलाएँ, पुष्प अर्पित।
जीमूतवाहन कथा
गन्धर्व राजा जीमूतवाहन की कथा — सर्प के शिकार को बचाने हेतु स्वयं बलिदान। केन्द्रीय अनुष्ठान। माँ का त्याग एवं सन्तान रक्षा सन्देश।
पारण
तृतीय दिन प्रातः — मड़ुआ रोटी + नोनी साग से व्रत तोड़ें। पुराना धागा उतारें, नया बाँधें। प्रसाद बाँटें। बच्चों को आशीर्वाद।
Main Mantra
ॐ जीमूतवाहनाय नमः । हे सन्तान रक्षक देव रक्षा करो । ॐ विष्णवे नमः ।
Benefits of this Puja
सन्तान दीर्घायु, माँ-बच्चे बन्धन, जीमूतवाहन कृपा, मिथिला मातृशक्ति, सर्व-विघ्न निवारण।
Important Notes
बेर-बेर पुछल जाएबला प्रश्न
जितिया / जीमूतवाहन व्रत विधि (मिथिला) कहिया कएल जाइत अछि आ शुभ मुहूर्त की अछि?
आश्विन कृष्ण अष्टमी — तीन दिवसीय व्रत (सितम्बर–अक्टूबर) — नहाय-खाय = प्रथम दिन; खुर-जितिया = 36 घण्टे निर्जला; पारण = तृतीय दिन
जितिया / जीमूतवाहन व्रत विधि (मिथिला) लेल कोन पूजा सामग्री चाही?
मड़ुआ (रागी) आटा, नोनी साग, जितिया का धागा, फल, घी दीपक, हल्दी, सिन्दूर, अरिपन पाउडर, चावल, पुष्प, अगरबत्ती, दूध, जल (पारण हेतु)
जितिया / जीमूतवाहन व्रत विधि (मिथिला) मे कोन मंत्र जपल जाइत अछि?
ॐ जीमूतवाहनाय नमः । हे सन्तान रक्षक देव रक्षा करो । ॐ विष्णवे नमः ।
जितिया / जीमूतवाहन व्रत विधि (मिथिला) करबा सँ की लाभ भेटैत अछि?
सन्तान दीर्घायु, माँ-बच्चे बन्धन, जीमूतवाहन कृपा, मिथिला मातृशक्ति, सर्व-विघ्न निवारण।