दियारी / जमदियारी बिधि
जमदियारी (यम द्वितीया) दीवाली से एक-दो दिन पहिले पुरान दीया जरा के यमराज (जम राजा) के संतुष्ट कइल जाला। भोजपुरी इलाका में ई "दियारी" के सबसे गूढ़ आ पुरान सिरिस्ता बा। दक्षिण दिशा में दीया रख के यमराज के प्रार्थना कइल जाला — जवना से अकाल मृत्यु ना होखे। धनतेरस के पहिले ई बिधि कइल जाला।
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी / धनतेरस से पहिले (अक्टूबर–नवंबर)
संझा — सूर्यास्त के बाद
Puja Samagri (Items Required)
- पुरान मिट्टी के दीया
- सरसों के तेल
- बाती (कपास)
- अक्षत, फूल
Puja Procedure — Steps
दीया तैयारी
पुरान मिट्टी के दीया लीं (नया ना)। सरसों के तेल आ बाती डालीं।
दक्षिण दिशा में दीया
घर के दक्षिण दिशा में दीया रखीं — यमराज दक्षिण दिशा के देवता बाड़ें। दीया जराईं।
यमराज प्रार्थना
"यम राजा के दियरवा जरावतानी" — ई मन में बोलत यमराज से अकाल मृत्यु से रक्षा के प्रार्थना करीं।
परिवार सुरक्षा कामना
परिवार के सब सदस्य के दीर्घायु खातिर प्रार्थना करीं। दीया बुझे तक ओहिजे रहे दीं।
Main Mantra
यमराज के दियरवा जरावतानी, अकाल मृत्यु से बचावा महराज। जम दियारी जरल हो, परिवार सुखी रहल हो!
Benefits of this Puja
जमदियारी से अकाल मृत्यु से रक्षा, यमराज के कृपा, परिवार के दीर्घायु आ भय-मुक्ति मिलेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दियारी / जमदियारी बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी / धनतेरस से पहिले (अक्टूबर–नवंबर) — संझा — सूर्यास्त के बाद
दियारी / जमदियारी बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
पुरान मिट्टी के दीया, सरसों के तेल, बाती (कपास), अक्षत, फूल
दियारी / जमदियारी बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
यमराज के दियरवा जरावतानी, अकाल मृत्यु से बचावा महराज। जम दियारी जरल हो, परिवार सुखी रहल हो!
दियारी / जमदियारी बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
जमदियारी से अकाल मृत्यु से रक्षा, यमराज के कृपा, परिवार के दीर्घायु आ भय-मुक्ति मिलेला।