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माता शारिका (त्रिपुरसुन्दरी — हरि पर्बत की अधिष्ठात्री)

हर नवमी — माता शारिका पूजा विधि (हरि पर्बत)

Last updated: 14 June 2026

हर नवमी कश्मीरी पण्डितों का प्रमुख देवी-पर्व है, श्रीनगर के हरि पर्बत पर विराजमान माता शारिका (त्रिपुरसुन्दरी) को समर्पित। माता शारिका कश्मीर-घाटी की अधिष्ठात्री देवी हैं। चैत्र शुक्ल नवमी को यह पर्व मनाया जाता है। हरि पर्बत की यात्रा, माता शारिका के मन्दिर में पूजा, एवं विशेष हवन इस विधि के अंग हैं।

Occasion

चैत्र शुक्ल नवमी (मार्च–अप्रैल, नवरात्रि काल)

Muhurat

प्रातःकाल — सूर्योदय से मध्याह्न

Puja Samagri (Items Required)

  • पुष्प
  • कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, अक्षत
  • नारियल, मिश्री, सूखे मेवे
  • लाल चुनरी (माता हेतु)
  • दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर
  • हवन सामग्री (लोबान, गुग्गुल)
  • नवीद

Puja Procedure — Steps

Step 1

हरि पर्बत यात्रा / घर पूजा

कश्मीर में — हरि पर्बत (श्रीनगर) की यात्रा करें, माता शारिका मन्दिर पहुँचें। प्रवासी पण्डित — घर के ठोकुर कुठ में माता शारिका का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें, हरि पर्बत का ध्यान करें।

Step 2

माता शारिका पूजन

कुमकुम-सिन्दूर-चन्दन तिलक लगाएँ। लाल चुनरी अर्पित करें। पुष्प (कमल, गुलाब) चढ़ाएँ। नारियल, मिश्री, सूखे मेवे अर्पित करें। "ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः" जपें।

Step 3

हवन

हवन कुण्ड में अग्नि प्रज्वलित करें। लोबान, गुग्गुल, हवन सामग्री डालें। "ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः स्वाहा" मन्त्र से आहुतियाँ दें। कश्मीर की शान्ति, परिवार की सुरक्षा हेतु प्रार्थना करें।

Step 4

नवीद एवं प्रार्थना

माता शारिका को नवीद (मिठाई, फल) अर्पित करें। कर्पूर आरती करें। नवीद बाँटें। माता शारिका से कश्मीर-भूमि एवं समुदाय की रक्षा हेतु प्रार्थना करें।

Main Mantra

ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः स्वाहा ।

जय माता शारिके, हरि-पर्बत-वासिनि ।

Benefits of this Puja

हर नवमी पूजा से माता शारिका (त्रिपुरसुन्दरी) की विशेष कृपा, कश्मीर-भूमि से आध्यात्मिक जुड़ाव, शत्रु-नाश, सर्व-रक्षा, समुदाय की एकता।

Important Notes

• हरि पर्बत = श्रीनगर का पवित्र पर्वत — माता शारिका का स्थान। • माता शारिका = कश्मीरी पण्डितों की प्रमुख देवी। • त्रिपुरसुन्दरी = शाक्त-तान्त्रिक परम्परा। • हवन = इस पूजा का अनिवार्य अंग। • प्रवासी पण्डित चित्र-पूजा करें, हरि पर्बत का ध्यान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर नवमी — माता शारिका पूजा विधि (हरि पर्बत) कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

चैत्र शुक्ल नवमी (मार्च–अप्रैल, नवरात्रि काल) — प्रातःकाल — सूर्योदय से मध्याह्न

हर नवमी — माता शारिका पूजा विधि (हरि पर्बत) के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

पुष्प, कुमकुम, सिन्दूर, चन्दन, अक्षत, नारियल, मिश्री, सूखे मेवे, लाल चुनरी (माता हेतु), दीपक, अगरबत्ती, कर्पूर, हवन सामग्री (लोबान, गुग्गुल), नवीद

हर नवमी — माता शारिका पूजा विधि (हरि पर्बत) में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै नमः । ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः स्वाहा । जय माता शारिके, हरि-पर्बत-वासिनि ।

हर नवमी — माता शारिका पूजा विधि (हरि पर्बत) करने से क्या लाभ मिलते हैं?

हर नवमी पूजा से माता शारिका (त्रिपुरसुन्दरी) की विशेष कृपा, कश्मीर-भूमि से आध्यात्मिक जुड़ाव, शत्रु-नाश, सर्व-रक्षा, समुदाय की एकता।

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