गोधन पूजा बिधि
गोधन पूजा दीपावली के दूसरा दिन (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) मनावल जाला। गोबर से गोवर्धन के आकार बनाइल जाला, उनका पूजा कइल जाला आ एक अनोखा "गारी" (गालि) देवे के सिरिस्ता बा जवना में भउजी भइया के गारी देली आ फेरु आशीर्वाद देली। गाय-गोरू के पूजा भोजपुरी संस्कृति में बहुत पवित्र बा।
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के दूसरा दिन — अक्टूबर/नवंबर)
सबेरे — गोबर से पूजा तइयार
Puja Samagri (Items Required)
- गोबर (गाय के गोबर)
- फूल, मालन, रोली
- गन्ना, फल, मीठाई
- दीया, अगरबत्ती, कपूर
- दही, दूध
Puja Procedure — Steps
गोवर्धन बनावल
घर के सामने गोबर से गोवर्धन पर्वत के आकार बनाईं। ऊपर फूल-माला, दूब आ गन्ना सजाईं। गोधन के बीच में एक गड्ढा बनाईं जवना में दूध-दही रखीं।
पूजन
गोवर्धन जी के रोली, अक्षत, फूल, दीया, धूप से पूजा करीं। "गोवर्धन महाराज की जय!" बोलीं। परिक्रमा करीं।
गारी
भउजी (भाभी) लोग देवर-भइया लोग के "गारी" (लोक गाली) देली — ई हँसी-ठिठोली के सिरिस्ता बा। फेरु आशीर्वाद देवेली आ मीठाई खवावेली। ई भोजपुरी के अनूठी परंपरा बा।
अन्नकूट भोग
तरह-तरह के पकवान बना के गोवर्धन जी के नेवता (भोग) लगाईं। प्रसाद बँटाईं।
Main Mantra
गोवर्धन धरौ मोरे मनवा, कृष्ण कन्हैया उठवलन गिरिराज! गोधन के दिना सब सुखी होखो, गोवर्धन गिरिराज महाराज!
Benefits of this Puja
गोधन पूजा से गाय-गोरू के रक्षा, कृषि में समृद्धि, परिवार में हँसी-खुशी आ गोवर्धन जी के कृपा मिलेला।
Important Notes
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोधन पूजा बिधि कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के दूसरा दिन — अक्टूबर/नवंबर) — सबेरे — गोबर से पूजा तइयार
गोधन पूजा बिधि के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?
गोबर (गाय के गोबर), फूल, मालन, रोली, गन्ना, फल, मीठाई, दीया, अगरबत्ती, कपूर, दही, दूध
गोधन पूजा बिधि में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?
गोवर्धन धरौ मोरे मनवा, कृष्ण कन्हैया उठवलन गिरिराज! गोधन के दिना सब सुखी होखो, गोवर्धन गिरिराज महाराज!
गोधन पूजा बिधि करने से क्या लाभ मिलते हैं?
गोधन पूजा से गाय-गोरू के रक्षा, कृषि में समृद्धि, परिवार में हँसी-खुशी आ गोवर्धन जी के कृपा मिलेला।