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माता गंगा

गंगा दशहरा विधि — गढ़वाली

Last updated: 14 June 2026

गंगा दशहरा देवभूमि उत्तराखंड को सबसे पवित्र स्नान पर्व छ — ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (मई-जून) मा मनाई जान्दो छ। इस दिन माता गंगा स्वर्ग से पृथ्वी मा अवतरित हुई थीं। हरिद्वार अर ऋषिकेश मा लाखों श्रद्धालु गंगा मा दस डुबकी लगांदन — दस पाप नष्ट हूंदन। गंगा आरती, दीप-दान अर तर्पण हूंदो छ। ये गढ़वाल की पहचान छ क्योंकि गंगा गढ़वाल मा ई जन्मी छ।

Occasion

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (मई-जून)

Muhurat

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ)

Puja Samagri (Items Required)

  • गंगाजल (स्नान कू)
  • दीपक (मिट्टी के, दीप-दान कू)
  • फूल-माला, पुष्पांजलि
  • चावल, तिल (तर्पण कू)
  • नारियल, फल, मिठाई
  • धूप, कपूर, अगरबत्ती
  • कलश (गंगाजल भरन कू)
  • वस्त्र (दान कू)

Puja Procedure — Steps

Step 1

प्रातः गंगा स्नान

ब्रह्म मुहूर्त मा गंगा किनारे जाओ — हरिद्वार (हर की पैड़ी) या ऋषिकेश सबसे उत्तम छ। गंगा मा दस डुबकी लगाओ — हर डुबकी मा एक पाप नष्ट हूंदो छ। "ॐ नमो गंगायै" बोलते हुए स्नान करो।

Step 2

गंगा पूजा

स्नान के बाद गंगा किनारे बैठकै पूजा करो। फूल-माला, नारियल, फल, मिठाई अर्पित करो। कलश मा गंगाजल भरो — घर लेकै जाओ। धूप-कपूर जलाओ।

Step 3

तर्पण

पितृदेवों कू तर्पण दियो — गंगाजल मा तिल अर चावल मिलाई कै पूर्व दिशा मा अर्पित करो। पितरों को नाम लेकै बोलो: "ॐ [नाम] तृप्यताम्।" ये पितरों की शांति कू छ।

Step 4

दीप-दान

शाम कू गंगा मा दीप-दान करो — मिट्टी के दीपक मा घी डालकै जलाओ, फूल की पत्तियां लगाओ अर गंगा मा बहाओ। हज़ारों दीपक गंगा मा तैरदन — ये अद्भुत दृश्य छ।

Step 5

गंगा आरती

शाम कू हर की पैड़ी (हरिद्वार) या त्रिवेणी घाट (ऋषिकेश) मा गंगा आरती मा शामिल होओ। भव्य आरती मा हज़ारों लोग भाग लेंदन। "ॐ जय गंगे माता" गाओ। कपूर जलाओ। ये जीवन मा एक बार अनुभव करणो ज़रूरी छ।

Main Mantra

ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नमः।
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।

देवभूमि मा गंगा जन्मी, गढ़वाल को गौरव छ,
दस डुबकी लगाओ, दस पाप धुलन,
माता गंगा की जय हो।

Benefits of this Puja

गंगा दशहरा से दस पापों को नाश, माता गंगा का आशीर्वाद, पितरों की शांति, आत्मा की शुद्धि अर देवभूमि से गहरा जुड़ाव हूंदो छ।

Important Notes

• दस डुबकी ज़रूर लगाओ — कम मत करो। • गंगा मा प्लास्टिक या प्रदूषण मत फैलाओ — गंगा कू स्वच्छ रखो। • दीपक मिट्टी के ई वर्तो — प्लास्टिक के मत। • कलश मा गंगाजल घर ज़रूर लाओ — वर्ष भर काम आंदो छ। • तर्पण बिना गंगा दशहरा अधूरो छ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा दशहरा विधि — गढ़वाली कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (मई-जून) — ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ)

गंगा दशहरा विधि — गढ़वाली के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

गंगाजल (स्नान कू), दीपक (मिट्टी के, दीप-दान कू), फूल-माला, पुष्पांजलि, चावल, तिल (तर्पण कू), नारियल, फल, मिठाई, धूप, कपूर, अगरबत्ती, कलश (गंगाजल भरन कू), वस्त्र (दान कू)

गंगा दशहरा विधि — गढ़वाली में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नमः। गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु। देवभूमि मा गंगा जन्मी, गढ़वाल को गौरव छ, दस डुबकी लगाओ, दस पाप धुलन, माता गंगा की जय हो।

गंगा दशहरा विधि — गढ़वाली करने से क्या लाभ मिलते हैं?

गंगा दशहरा से दस पापों को नाश, माता गंगा का आशीर्वाद, पितरों की शांति, आत्मा की शुद्धि अर देवभूमि से गहरा जुड़ाव हूंदो छ।

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