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पृथ्वी माता / ग्राम-देवी / लक्ष्मी

धालो एवं फुगडी — मातृदेवी नृत्य-पूजा विधि (कोंकणी)

Last updated: 14 June 2026

धालो एवं फुगडी कोंकणी महिलाओं की विशिष्ट अनुष्ठानिक लोक-नृत्य पूजा है। "धालो" में महिलाएँ मन्दिर प्रांगण या खुले स्थान पर एकत्र होकर गोलाकार नृत्य करती हैं — पृथ्वी माता/ग्राम-देवी/लक्ष्मी की स्तुति में गीत गाती हैं। "फुगडी" एक विशेष हाथ-थपकी नृत्य है — दो या अधिक महिलाएँ हाथ पकड़कर ताल पर घूमती हैं। यह कोंकणी महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान है।

Occasion

पूर्णिमा, नवरात्रि, विशेष देवी-पर्व — वर्षभर

Muhurat

सन्ध्या — रात्रि (दीपक प्रकाश में)

Puja Samagri (Items Required)

  • दीपक (नारियल तेल
  • रंगोली (गोलाकार)
  • नारियल, पान, सुपारी, हल्दी-कुमकुम
  • पारम्परिक कोंकणी वेशभूषा (साड़ी
  • ढोलकी / मादल (वैकल्पिक)

Puja Procedure — Steps

Step 1

स्थान-सज्जा एवं रंगोली

मन्दिर प्रांगण / खुले स्थान को शुद्ध करें। गोलाकार रंगोली बनाएँ। दीपक गोले में रखें। मध्य में कलश/देवी प्रतिमा स्थापित करें। हल्दी-कुमकुम, पुष्प अर्पित करें।

Step 2

धालो नृत्य

महिलाएँ पारम्परिक कोंकणी साड़ी पहनें। गोलाकार खड़ी हों — दीपक/कलश के चारों ओर। ताली बजाते हुए गोलाकार नृत्य प्रारम्भ करें। पृथ्वी माता/देवी की स्तुति गीत गाएँ — "धालो रे धालो, आमची देवी आमकां सांभाळ।"

Step 3

फुगडी नृत्य

दो-दो/चार-चार महिलाएँ जोड़ी बनाएँ। हाथ पकड़कर ताल पर तेज़ी से घूमें — यही "फुगडी" है। बिना थके जो सबसे अधिक देर तक घूमे = विजेता। फुगडी = कोंकणी महिलाओं की शक्ति एवं एकता का प्रतीक।

Step 4

देवी पूजा एवं नैवेद्य

नृत्य पश्चात् देवी/पृथ्वी माता को नैवेद्य अर्पित करें। कर्पूर आरती। हल्दी-कुमकुम बाँटें। नारियल-गुड़ प्रसाद बाँटें। महिलाओं का सम्मान — बड़ों के चरण स्पर्श।

Main Mantra

ॐ भूम्यै नमः ।

धालो रे धालो, आमची देवी आमकां सांभाळ ।

ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः ।

Benefits of this Puja

धालो-फुगडी से पृथ्वी माता/देवी की कृपा, महिला एकता-सशक्तिकरण, शारीरिक स्वास्थ्य, कोंकणी लोक-परम्परा का संरक्षण।

Important Notes

• धालो = गोलाकार अनुष्ठानिक नृत्य — महिलाएँ ही करती हैं। • फुगडी = हाथ-थपकी नृत्य — कोंकणी विशेष। • दीपक = गोलाकार रखें — पवित्र वृत्त। • पृथ्वी माता = कोंकणी लोक-विश्वास — भूमि-पूजा। • वर्षभर विभिन्न अवसरों पर आयोजित।

सदांच विचारिल्ले प्रस्न

धालो एवं फुगडी — मातृदेवी नृत्य-पूजा विधि (कोंकणी) केन्ना करतात आनी शुभ मुहूर्त खंयचो?

पूर्णिमा, नवरात्रि, विशेष देवी-पर्व — वर्षभर — सन्ध्या — रात्रि (दीपक प्रकाश में)

धालो एवं फुगडी — मातृदेवी नृत्य-पूजा विधि (कोंकणी) खातीर खंयची पूजा सामग्री जाय?

दीपक (नारियल तेल, रंगोली (गोलाकार), नारियल, पान, सुपारी, हल्दी-कुमकुम, पारम्परिक कोंकणी वेशभूषा (साड़ी, ढोलकी / मादल (वैकल्पिक)

धालो एवं फुगडी — मातृदेवी नृत्य-पूजा विधि (कोंकणी)ंत खंयचो मंत्र जपतात?

ॐ भूम्यै नमः । धालो रे धालो, आमची देवी आमकां सांभाळ । ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः ।

धालो एवं फुगडी — मातृदेवी नृत्य-पूजा विधि (कोंकणी) केल्यान खंयचे लाभ मेळटात?

धालो-फुगडी से पृथ्वी माता/देवी की कृपा, महिला एकता-सशक्तिकरण, शारीरिक स्वास्थ्य, कोंकणी लोक-परम्परा का संरक्षण।

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धालो एवं फुगडी — मातृदेवी नृत्य-पूजा विधि (कोंकणी) — Complete Guide | VedKosh