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माता बाराही देवी

बग्वाल (देवीधुरा) विधि — गढ़वाली

Last updated: 14 June 2026

बग्वाल उत्तराखंड को सबसे अनोखो अर प्राचीन त्योहार छ — देवीधुरा (चम्पावत) मा माता बाराही देवी कू प्रसन्न करन कू पत्थर मार उत्सव होंदो छ। ये रक्षाबंधन के दिन मनाई जान्दो छ। चार खाम (कबीले) — गहड़वाल, लमगड़िया, चम्याल, वालिक — एक-दूसरे मा पत्थर फेंकदन। ये प्रतीकात्मक युद्ध छ जो प्राचीन नरबलि की जगह शुरू हुओ। जब पर्याप्त खून गिरदो छ तो मंदिर से शंख बजदो छ अर बग्वाल रुकदी छ।

Occasion

रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा)

Muhurat

श्रावण पूर्णिमा, मध्याह्न

Puja Samagri (Items Required)

  • पत्थर (छोटे गोल पत्थर)
  • ढाल (रिंगाल की)
  • फूल-माला, प्रसाद
  • धूप, अगरबत्ती, दीपक
  • नारियल, फल, मिठाई
  • बाराही देवी की पूजा सामग्री
  • छतर अर ध्वज

Puja Procedure — Steps

Step 1

बाराही देवी पूजा

बग्वाल से पहले देवीधुरा मंदिर मा बाराही देवी की विशेष पूजा हूंदी छ। चारों खाम के प्रतिनिधि मिलकै पूजा करदन। फूल, नारियल, प्रसाद चढ़ांदन। देवी से आशीर्वाद मांगी जान्दो छ कि बग्वाल सुरक्षित रहे।

Step 2

चारों खाम की तैयारी

गहड़वाल, लमगड़िया, चम्याल अर वालिक — चारों खाम अपनी-अपनी टीम बणांदन। छोटे गोल पत्थर इकट्ठा करदन। रिंगाल की ढाल बणांदन। युवा योद्धा तैयार हूंदन। ढोल-दमाऊ बजदो छ।

Step 3

बग्वाल — पत्थर युद्ध

मंदिर के प्रांगण मा चारों खाम आमने-सामने आंदन। शंख बजदो छ अर बग्वाल शुरू हूंदी छ — पत्थर एक-दूसरे मा फेंकी जांदन। ये प्रतीकात्मक छ — प्राचीन काल मा नरबलि होंदी थी, अब पत्थर से खून बहादो छ।

Step 4

शंख ध्वनि अर समापन

जब पर्याप्त खून गिरदो छ (प्रतीकात्मक बलिदान पूरो) तो मंदिर से शंख बजदो छ अर बग्वाल तुरंत रुकदी छ। सब एक-दूसरे कू गले लगांदन। घायलों की सेवा हूंदी छ। इसके बाद प्रसाद बांटिया जान्दो छ।

Step 5

समापन पूजा अर भोज

बग्वाल के बाद फिर बाराही देवी की पूजा हूंदी छ — कृतज्ञता व्यक्त करी जान्दी छ। सामूहिक भोज हूंदो छ। चारों खाम के लोग एक साथ खांदन-पीन्दन।

Main Mantra

ॐ बाराही देव्यै नमः।
माता बाराही, देवीधुरा की शक्ति,
तेरी बग्वाल मा सब आयो छन,
प्रतीकात्मक बलिदान स्वीकार कर,
सबकू सुरक्षा अर आशीर्वाद दे।

Benefits of this Puja

बग्वाल से बाराही देवी को आशीर्वाद, समुदाय मा एकता, प्राचीन परम्परा को संरक्षण, अर शौर्य-परीक्षा को अनुभव हूंदो छ।

Important Notes

• बग्वाल केवल परम्परा के अनुसार ई खेलो — अनियंत्रित हिंसा मत करो। • शंख बजते ई तुरंत रुक जाओ। • घायलों की तुरंत सेवा करो। • बाहरी लोग केवल दर्शक के रूप मा रहन — भाग मत लेन। • बाराही देवी की पूजा बग्वाल से पहले ज़रूरी छ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बग्वाल (देवीधुरा) विधि — गढ़वाली कब की जाती है और शुभ मुहूर्त क्या है?

रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) — श्रावण पूर्णिमा, मध्याह्न

बग्वाल (देवीधुरा) विधि — गढ़वाली के लिए कौन-सी पूजा सामग्री चाहिए?

पत्थर (छोटे गोल पत्थर), ढाल (रिंगाल की), फूल-माला, प्रसाद, धूप, अगरबत्ती, दीपक, नारियल, फल, मिठाई, बाराही देवी की पूजा सामग्री, छतर अर ध्वज

बग्वाल (देवीधुरा) विधि — गढ़वाली में कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

ॐ बाराही देव्यै नमः। माता बाराही, देवीधुरा की शक्ति, तेरी बग्वाल मा सब आयो छन, प्रतीकात्मक बलिदान स्वीकार कर, सबकू सुरक्षा अर आशीर्वाद दे।

बग्वाल (देवीधुरा) विधि — गढ़वाली करने से क्या लाभ मिलते हैं?

बग्वाल से बाराही देवी को आशीर्वाद, समुदाय मा एकता, प्राचीन परम्परा को संरक्षण, अर शौर्य-परीक्षा को अनुभव हूंदो छ।

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