
दुर्गा पूजा (कलश स्थापना) बिधि
नवरात्र में दुर्गा पूजा भोजपुरी इलाका में "कलश स्थापना" से शुरू होखेला। प्रतिपदा के कलश बइठावल, जवार (जौ) बोवल, नवो दिन ज्योत जरावल आ नवमी के होम — ई सब भोजपुरी गृहस्थ परंपरा बा। "माई के जगाइल" (अमवस से पहिले) बहुत भक्ति से कइल जाला। दशमी के विजयादशमी (दशहरा) मनावल जाला।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (सितंबर–अक्टूबर)
प्रतिपदा के सबेरे — अभिजित मुहूर्त में
Puja Samagri (Items Required)
- कलश (ताँबा/मिट्टी), जल, आमपत्ता, नारियल
- जवार (जौ) के बीज, मिट्टी
- अखंड ज्योत के दीया, घी
- दुर्गा सप्तशती/चंडी पाठ
- लाल कपड़ा, सिंदूर, फूल
- नारियल, केला, पान-सुपारी
- हवन सामग्री
Puja Procedure — Steps
कलश स्थापना
प्रतिपदा के सबेरे साफ-सफाई के बाद कलश में जल, आमपत्ता, नारियल रख के स्थापित करीं। कलश के चारो ओर जवार (जौ) बोईं। लाल कपड़ा बिछाईं।
अखंड ज्योत
घी के अखंड ज्योत (दीया) प्रज्वलित करीं। ई ज्योत 9 दिन बुझे ना चाहीं — रोज घी डालत रहीं।
नवो दिन पूजा
रोज दुर्गा माई के फूल, सिंदूर, फल, भोग चढ़ाईं। दुर्गा चालीसा या सप्तशती पाठ करीं। नवमी के हवन करीं।
विसर्जन आ दशहरा
कलश विसर्जन करीं। जवार (जौ) के चारा शुभ मानल जाला। दशमी के विजयादशमी मनाईं — शमी पत्ता लूटल जाला।
Main Mantra
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
Benefits of this Puja
नवरात्र पूजा से दुर्गा माई के कृपा, विघ्न-नाश, शत्रु-जय, गृह-शांति आ संतान-सुख मिलेला।