वट सावित्री बिधि
वट सावित्री व्रत भोजपुरी बेल्ट में सुहागिन महिला खातिर सबसे बड़ व्रत बा। ज्येष्ठ अमावस्या के बरगद (वट) के पेड़ के पूजा कइल जाला। सावित्री भगवान यमराज से अपना पति सत्यवान के प्राण वापस लइली — ई कथा हर सुहागिन के प्रेरणा बा। बरगद के पेड़ के परिक्रमा, सूत (धागा) बँधाना आ कथा सुनल — ई तीनो ज़रूरी बा।
ज्येष्ठ अमावस्या (मई–जून)
सबेरे — बरगद पूजा
Puja Samagri (Items Required)
- बरगद (वट) के पेड़
- लाल सूत (धागा)
- जल, दूध, फूल
- सिंदूर, रोली, अक्षत
- सुहाग के सामान
- फल, मीठाई
Puja Procedure — Steps
बरगद पूजा
सबेरे नहा-धो के बरगद के पेड़ पर जाईं। जल, दूध, फूल, सिंदूर चढ़ाईं। आरती करीं।
परिक्रमा आ सूत बँधाना
लाल सूत लपेटत बरगद के पेड़ के 7 बेर (या 108 बेर) परिक्रमा करीं। हर परिक्रमा में "सत्यवान सावित्री" के स्मरण करीं।
कथा
सावित्री-सत्यवान के कथा सुनीं। सावित्री के अडिग प्रेम आ यमराज से पति के प्राण वापस लेवे के कहानी।
प्रसाद
फल आ मीठाई के प्रसाद बँटाईं। व्रत खोलीं।
Main Mantra
ॐ सावित्र्यै नमः। वट मूले तु यत्तिष्ठन्ति या नार्यः पतिवत्सलाः। ता यान्ति परमं स्थानं सावित्री सह धर्मतः॥
Benefits of this Puja
वट सावित्री व्रत से पति के दीर्घायु, दाम्पत्य सुख, अखंड सुहाग आ यमराज के भय से मुक्ति मिलेला।